महासमुंद पुलिस की बड़ी कार्रवाई, महाराष्ट्र के कोल्हापुर से ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के मालिक और डायरेक्टर गिरफ्तार

महासमुंद पुलिस की बड़ी कार्रवाई, महाराष्ट्र के कोल्हापुर से ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के मालिक और डायरेक्टर गिरफ्तार

महासमुंद -  महासमुंद पुलिस ने बहुचर्चित एलपीजी गबन मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए ठाकुर पेट्रो कैमिकल्स के मालिक संतोष सिंह ठाकुर और उनके पुत्र सार्थक सिंह ठाकुर को महाराष्ट्र के कोल्हापुर से गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार करोड़ों रुपए के इस गैस गबन कांड में कई सरकारी और निजी लोगों की मिलीभगत सामने आई है, जबकि जांच में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं।

पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि खाद्य अधिकारी अजय कुमार यादव इस पूरे षड्यंत्र का मुख्य सूत्रधार था, जबकि पंकज चंद्राकर कथित तौर पर सौदे का “डील मेकर” बना हुआ था। वहीं मनीष चौधरी ने विभिन्न एजेंसियों के बीच मध्यस्थता कर रकम तय कराने में भूमिका निभाई। पुलिस के मुताबिक शुरुआत में 1 करोड़ 30 लाख रुपए की मांग की गई थी, लेकिन करीब एक सप्ताह तक चली बातचीत के बाद 90 लाख रुपए में कथित “गबन सौदा” तय हुआ।

मामला थाना सिंघोड़ा क्षेत्र से जुड़ा है, जहां दिसंबर 2025 में छह एलपीजी गैस से भरे कैप्सूल ट्रक जब्त किए गए थे। भीषण गर्मी और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इन ट्रकों को सुरक्षित रखने के लिए जिला प्रशासन की अनुमति से ठाकुर पेट्रो कैमिकल्स को सुपुर्द किया गया था। पुलिस का आरोप है कि सुपुर्दनामा मिलने के बाद गैस को सुरक्षित रखने के बजाय योजनाबद्ध तरीके से उसका गबन कर लिया गया।

जांच में सामने आया कि 87 टन एलपीजी गैस, जिसकी कीमत करीब 77 लाख रुपए बताई गई है, को कथित रूप से बाजार में अलग-अलग एजेंसियों और संस्थानों को बेच दिया गया। पुलिस के अनुसार इस गैस को बिना GST और कच्चे बिलों के जरिए मनमाने दामों पर खपाया गया। अप्रैल महीने में केवल 40 टन एलपीजी की खरीद के मुकाबले 135 टन एलपीजी बेचे जाने के दस्तावेज सामने आने से पुलिस को बड़े पैमाने पर हेराफेरी का शक हुआ।

पुलिस ने दावा किया है कि गबन की साजिश सुपुर्दनामा मिलने से 11 दिन पहले ही शुरू हो चुकी थी। आरोप है कि गैस से भरे कैप्सूल ट्रकों का सही तौल नहीं कराया गया और बाद में फर्जी पंचनामा तैयार किया गया। इतना ही नहीं, कथित तौर पर उन्हीं लोगों को गवाह बनाया गया जो इस पूरे षड्यंत्र में शामिल थे। जांच एजेंसियों ने टावर डंप, सीडीआर, टोल डेटा, सोशल मीडिया गतिविधियों और फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन का विश्लेषण कर आरोपियों तक पहुंच बनाई।

मुख्य आरोपी संतोष सिंह ठाकुर और सार्थक सिंह ठाकुर गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार शहर बदल रहे थे। पुलिस के अनुसार दोनों ने कई मोबाइल और सिम कार्ड बदले तथा रायपुर, कवर्धा, कान्हा-किसली, कोलकाता, पुणे, मुंबई और कोल्हापुर सहित कई स्थानों पर ठिकाने बदले। आखिरकार कोल्हापुर के एक होटल में छिपे होने की सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस की मदद से दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।

इस मामले में पहले ही निखिल वैष्णव, पंकज चंद्राकर, मनीष चौधरी और खाद्य अधिकारी अजय कुमार यादव को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में आरोपियों की संख्या और बढ़ सकती है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. जब करोड़ों की एलपीजी गैस निजी कंपनी को सुपुर्द की जा रही थी, तब उसकी निगरानी और सुरक्षा के लिए प्रशासन ने कौन-सी जवाबदेही तय की थी, और वह पूरी तरह विफल क्यों हुई?
  2. क्या इस मामले में केवल कुछ अधिकारियों और कारोबारियों की मिलीभगत थी, या जांच बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण की ओर भी इशारा कर रही है?
  3. फर्जी तौल पंचनामा, बिना GST बिक्री और 135 टन गैस बिक्री जैसे गंभीर संकेत लंबे समय तक विभागीय सिस्टम से छिपे कैसे रहे — क्या यह संस्थागत भ्रष्टाचार का मामला नहीं है?

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