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| झाबुआ; सिर्फ योजना नहीं, अब ‘महिला वर्कफोर्स’ बनेगी: मध्यप्रदेश में रोजगार का नया ब्लूप्रिंट तैयार |
झाबुआ - मध्यप्रदेश में महिला सशक्तिकरण को योजनाओं से आगे ले जाकर रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता से जोड़ने की दिशा में बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया है। महिला-बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया की अध्यक्षता में मंत्रालय में आयोजित मध्यप्रदेश महिला वित्त एवं विकास निगम की 80वीं संचालक मंडल बैठक में महिलाओं के कौशल, प्रशिक्षण और रोजगार को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में स्पष्ट किया गया कि अब महिला वित्त एवं विकास निगम केवल वित्तीय सहायता तक सीमित संस्था नहीं रहेगा, बल्कि महिलाओं को रोजगार, कौशल विकास, बाज़ार संपर्क और उद्यमिता से जोड़ने वाले प्रमुख प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया जाएगा।
मंत्री भूरिया ने कहा कि विभाग का उद्देश्य केवल योजनाएं चलाना नहीं बल्कि महिलाओं का वास्तविक आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण सुनिश्चित करना है। इसी दिशा में महिलाओं के लिए एक व्यापक ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया जाएगा, जिसमें महिलाओं की कौशल क्षमता का आकलन कर उन्हें कुशल, अर्द्ध-कुशल और अकुशल श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा। बैठक में यह भी तय किया गया कि अकुशल और अर्द्ध-कुशल महिलाओं को मांग आधारित प्रशिक्षण देकर विभिन्न विभागों, उद्योगों और संस्थानों से जोड़ा जाएगा। इसके लिए निगम महिला श्रमिकों, कारीगरों और तकनीकी रूप से प्रशिक्षित महिलाओं का “रिसोर्स पूल” तैयार करेगा, ताकि जरूरत के अनुसार प्रशिक्षित महिला कार्यबल उपलब्ध कराया जा सके।
बैठक में “शी-मार्ट” मॉडल को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। संचालक मंडल ने इस बात पर नाराज़गी जताई कि अक्टूबर 2024 में स्वीकृत प्रस्ताव पर समय पर काम नहीं हो सका। अधिकारियों ने माना कि यदि समय रहते इसे लागू किया जाता तो मध्यप्रदेश इस मॉडल में अग्रणी राज्य बन सकता था। महिला उद्यमिता और प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुधारने के लिए यह भी तय किया गया कि केवल गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण संस्थानों और विशेषज्ञ एजेंसियों को ही निगम से जोड़ा जाएगा। साथ ही कौशल विकास और वित्तीय साक्षरता कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।
बैठक में IPE Global Limited के साथ हुए एमओयू की समीक्षा भी की गई। “देवी अहिल्याबाई नारी सशक्तिकरण मिशन” के तहत वर्ष 2030 तक 1.6 लाख महिलाओं को रोजगार, 50 हजार महिलाओं को बाजार आधारित प्रशिक्षण और 500 से अधिक कंपनियों में जेंडर डाइवर्सिटी को बढ़ावा देने का लक्ष्य तय किया गया है। बैठक में प्रशासनिक अनुशासन को लेकर भी सख्त रुख अपनाया गया। निर्णय लिया गया कि निगम के ऐसे कर्मचारी जो अन्य स्थानों पर अटैच हैं, उन्हें नोटिस जारी किए जाएंगे और निर्धारित समय में मूल पदस्थापना पर नहीं लौटने पर सेवा समाप्ति की कार्रवाई की जा सकती है। बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव जी.वी. रश्मि, आयुक्त निधि निवेदिता सहित निगम के अधिकारी उपस्थित रहे।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
2. “शी-मार्ट” प्रस्ताव 2024 से लंबित रहा—इस देरी के लिए जिम्मेदारी किसकी तय की गई और क्या कोई जवाबदेही तय होगी?
3. महिलाओं की स्किल मैपिंग और “रिसोर्स पूल” बनने के बाद क्या रोजगार उपलब्ध कराना भी सरकार की जवाबदेही होगी या यह केवल प्रशिक्षण तक सीमित रहेगा?
