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| कर्मचारियों और पेंशनर्स की लॉटरी: हर 5 साल में बढ़ेगी पेंशन, फैमिली पेंशन में कटौती का खेल खत्म |
नई दिल्ली - सरकारी सेवा से रिटायर हो चुके बुजुर्गों और सेवारत कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने एक मील का पत्थर (Milestone) स्थापित करने वाला कदम उठाया है। कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन ने कर्मचारियों की 5 सबसे बड़ी और जटिल मांगों पर न केवल लिखित आश्वासन दिया है, बल्कि कुछ संवेदनशील नियमों को तत्काल बदलने के कड़े निर्देश भी जारी कर दिए हैं। आगामी 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन से ठीक पहले आए इस फैसले से देश भर के लाखों परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
कैबिनेट सचिव के 5 बड़े और ऐतिहासिक फैसले... एक नजर में:
1. हर 5 साल में पेंशन बढ़ाने का 'मास्टर प्लान'
बदलाव: वर्तमान में पेंशनर्स की मूल पेंशन में बड़ी बढ़ोतरी सिर्फ हर 10 साल में (नए वेतन आयोग के आने पर) होती है, जिससे बढ़ती महंगाई में बुजुर्गों को दिक्कत होती है। संसदीय समिति की सिफारिश के आधार पर अब कर्मचारी संघ ने हर 5 साल में आनुपातिक पेंशन बढ़ाने की मांग की थी।
बड़ा आश्वासन: कैबिनेट सचिव ने इस बेहद महत्वपूर्ण मुद्दे को सरकार द्वारा 8वें वेतन आयोग के विचारार्थ (Terms of Reference) भेजने का लिखित आश्वासन दिया है।
2. फैमिली पेंशन अब 30% पर नहीं सिमटेगी
बदलाव: मौजूदा नियम के तहत कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसकी विधवा या विधुर को मिलने वाली 'फैमिली पेंशन' घटकर आखिरी सैलरी का सिर्फ 30% रह जाती है।
बड़ा आश्वासन: इस भावुक और आर्थिक संकट से जुड़ी मांग को स्वीकार करते हुए कैबिनेट सचिव ने इसे भी समीक्षा के लिए 8वें वेतन आयोग के पास भेजने की मंजूरी दे दी है, ताकि आश्रितों को पूरा हक मिल सके।
3. दिव्यांग आश्रित बच्चों को 'सरकारी प्रताड़ना' से मुक्ति
बदलाव: मृत कर्मचारी के पूरी तरह दिव्यांग (Disabled) बच्चों को जीवनभर फैमिली पेंशन मिलती है, लेकिन इसके लिए उन्हें बार-बार अधिकारियों के चक्कर काटकर 'नो इनकम सर्टिफिकेट' (आय प्रमाण पत्र) जमा करना पड़ता था।
बड़ा निर्देश: कैबिनेट सचिव ने पेंशन विभाग (DOP&PW) को सख्त निर्देश दिए हैं कि एक मानवीय और तार्किक दृष्टिकोण अपनाते हुए इस 'आय प्रमाण पत्र' की अनिवार्यता को पूरी तरह समाप्त किया जाए।
4. अनुकंपा और पुरानी रिक्तियों वालों को मिलेगी 'पुरानी पेंशन' (OPS)
बदलाव: 22 दिसंबर 2003 को एनपीएस (NPS) का नोटिफिकेशन जारी हुआ था, लेकिन जिनकी वैकेंसी पहले की थी या जिनके पद पहले स्वीकृत थे और प्रशासनिक देरी से उनकी जॉइनिंग 2004 में हुई, उनके लिए सरकार ने विस्तृत नोट मांगा है।
बड़ा फैसला: सबसे बड़ा धमाका अनुकंपा नियुक्तियों (Compassionate Appointments) को लेकर हुआ है। जिन आश्रितों ने नौकरी के लिए आवेदन 22 दिसंबर 2003 से पहले किया था, लेकिन नौकरी 2004 में मिली, उन्हें एक हफ्ते के भीतर पुरानी पेंशन (OPS) का लाभ देने का वादा सचिव ने किया है।
5. विधवा और आश्रित 'बहू' को भी मिलेगा हक
बदलाव: यदि किसी सरकारी कर्मचारी के बेटे की मृत्यु हो चुकी है, तो उसकी आश्रित और विधवा बहू को 'परिवार' की सरकारी परिभाषा में जगह नहीं मिलती थी।
बड़ा निर्देश: कैबिनेट सचिव ने कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को निर्देश दिया है कि वे कानून मंत्रालय के साथ मिलकर इस नियम की तुरंत समीक्षा करें ताकि विधवा बहू को भी फैमिली पेंशन के दायरे में लाया जा सके।
