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| विदिशा; कलेक्टर अंशुल गुप्ता ने बताया गांवों को 'आत्मनिर्भर' बनाने का फॉर्मूला |
विदिशा - ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने नई पहल शुरू की है। कलेक्टर अंशुल गुप्ता ने पंचायत प्रतिनिधियों से कहा है कि वे केवल शासकीय अनुदानों पर निर्भर रहने की बजाय स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग कर आय के नए स्रोत विकसित करें। इससे पंचायतों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और विकास कार्यों को भी गति मिलेगी।
शुक्रवार को कुरवाई तहसील क्षेत्र की विभिन्न ग्राम पंचायतों के भ्रमण के दौरान कलेक्टर अंशुल गुप्ता ने पंचायतों में संधारित पंजियों, अभिलेखों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ बैठक कर पंचायतों की आय बढ़ाने के लिए नवाचार अपनाने पर जोर दिया।
कलेक्टर ने निर्देश दिए कि पंचायत क्षेत्र में स्थित वेयरहाउस, बहुउद्देशीय भवनों तथा अन्य परिसंपत्तियों का सर्वे कराया जाए और उन पर नियमानुसार संपत्ति कर निर्धारण की प्रक्रिया पूरी की जाए। उन्होंने कहा कि पंचायतों के पास उपलब्ध संसाधनों का व्यवस्थित उपयोग कर राजस्व बढ़ाया जा सकता है, जिससे स्थानीय विकास योजनाओं के लिए अतिरिक्त धन उपलब्ध होगा।
स्वच्छता को बनाया जा सकता है आय का साधन
भ्रमण के दौरान कलेक्टर ने स्वच्छता व्यवस्था की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि स्वच्छता केवल साफ-सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पंचायतों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत भी बन सकती है। यदि ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू की जाए तो इससे आर्थिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों को सुझाव दिया कि जैविक कचरे से खाद तैयार कर उसका बाजार में विक्रय किया जाए। इससे पंचायतों को अतिरिक्त आय प्राप्त होगी, गांवों में स्वच्छ वातावरण बनेगा और किसानों को जैविक खाद भी उपलब्ध हो सकेगी।
जनभागीदारी से बनेगा स्वावलंबी गांव
कलेक्टर अंशुल गुप्ता ने कहा कि गांवों के विकास में जनभागीदारी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पंचायतें यदि स्थानीय लोगों को साथ लेकर योजनाबद्ध तरीके से कार्य करें तो वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से स्वच्छता, संसाधन प्रबंधन और राजस्व संग्रहण के क्षेत्र में नवाचार अपनाने का आह्वान किया।
कलेक्टर ने कहा कि पंचायतों की आय में वृद्धि होने से गांवों में सड़क, पेयजल, स्वच्छता और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास कार्यों को और अधिक गति मिलेगी। प्रशासन का उद्देश्य ग्राम पंचायतों को स्वावलंबी और विकासोन्मुख बनाना है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी विकास का मॉडल तैयार किया जा सके।
