| बीजापुर; सिर्फ आवेदन नहीं, समाधान चाहिए… कलेक्टर ने अधिकारियों से मांगा ‘रिजल्ट मॉडल’ |
बीजापुर - जिले में प्रशासनिक कामकाज की गति और जनसमस्याओं के समाधान को लेकर आयोजित साप्ताहिक समय-सीमा बैठक में कलेक्टर श्री विश्वदीप ने विभागीय योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की और अधिकारियों को समयबद्ध तथा गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में सबसे अधिक फोकस सुशासन तिहार के दौरान प्राप्त आवेदनों और शिकायतों के निराकरण पर रहा। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि केवल आवेदन बंद करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि हर मामले का शत-प्रतिशत और गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन मामलों का समाधान जिला स्तर पर संभव है, उन्हें तत्काल निपटाया जाए, जबकि राज्य स्तर से जुड़े मामलों को बिना देरी आगे भेजा जाए और आवेदकों को उनके आवेदन की स्थिति की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाए।
धान उठाव और राजस्व मामलों पर सख्ती
बैठक में जिला विपणन अधिकारी से धान उठाव की समीक्षा की गई। कलेक्टर ने मिलर्स के साथ समन्वय बढ़ाकर शत-प्रतिशत धान उठाव सुनिश्चित करने को कहा। वहीं राजस्व अधिकारियों को लंबित मामलों का त्वरित निराकरण कर समय-सीमा के बाहर कोई प्रकरण लंबित नहीं रखने के निर्देश दिए।
आवास, सौर ऊर्जा और छात्रवृत्ति पर फोकस
नगरीय निकायों को प्रधानमंत्री आवास योजना के नए हितग्राहियों का चयन कर शीघ्र डीपीआर भेजने के निर्देश दिए गए। साथ ही प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त योजना के व्यापक प्रचार और लक्ष्य आधारित क्रियान्वयन पर भी जोर दिया गया।
बैठक में श्रम विभाग की योजनाओं की समीक्षा करते हुए पंजीकृत श्रमिकों के बच्चों को छात्रवृत्ति का लाभ सुनिश्चित करने के लिए श्रम, शिक्षा और आदिवासी विकास विभागों के बीच बेहतर समन्वय के निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने बताया कि कक्षा पहली से बारहवीं तक अध्ययनरत पात्र विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति उपलब्ध कराई जाती है।
स्वास्थ्य और शिक्षा एजेंडा भी चर्चा में
बैठक में एग्रीस्टेक पंजीयन, शाला त्यागी बच्चों की वापसी, दूरस्थ क्षेत्रों में टीकाकरण, खाद-बीज वितरण, सिकल सेल स्क्रीनिंग और बस्तर मुन्ने कार्यक्रम जैसे विषयों पर भी समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए। बैठक में जिला और उपखंड स्तर के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
1. सुशासन तिहार में प्राप्त कुल आवेदनों में अब तक कितने मामलों का वास्तविक समाधान हुआ और कितनों को केवल “निराकृत” दर्ज किया गया?
2. धान उठाव को लेकर निर्देश दिए गए हैं—लेकिन जिले में वर्तमान में कितना धान अब भी लंबित है और इसकी जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होगी?
3. छात्रवृत्ति और योजनाओं के लाभ की समीक्षा हुई—क्या प्रशासन के पास यह आंकड़ा है कि पात्र होने के बावजूद कितने बच्चे अब तक लाभ से वंचित हैं?