| गौरेला-पेंड्रा; शिविर में मिला समाधान… लेकिन मंच से खुल गया बड़ा सवाल—जिंदा आदमी को मृत किसने बना दिया? |
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही - सुशासन तिहार के तहत आयोजित जन समस्या निवारण शिविर में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने एक तरफ योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाने का दावा किया, तो दूसरी ओर एक ऐसे मामले ने सबका ध्यान खींचा जिसमें एक जीवित व्यक्ति को दस्तावेजों में मृत बताकर फौती नामांतरण का प्रस्ताव पारित कर दिया गया था। मरवाही विकासखंड की खंता पंचायत के ग्राम सपनी में आयोजित इस शिविर में 18 ग्राम पंचायतों के ग्रामीण बड़ी संख्या में पहुंचे। शिविर का उद्देश्य मांगों और शिकायतों का समाधान करना, योजनाओं की जानकारी देना और पात्र हितग्राहियों को मौके पर लाभ पहुंचाना रहा।
शिविर में आवास, शौचालय, डबरी निर्माण, सीसी रोड, पशु शेड, राशन कार्ड और राजस्व मामलों से जुड़े आवेदन प्राप्त हुए। कार्यक्रम में विधायक प्रणव कुमार मरपची, कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन, जिला पंचायत प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने विभागवार आवेदनों और उनकी स्थिति की जानकारी लोगों के सामने रखी। ग्रामीणों की मांगों पर विधायक ने ग्राम बंधौरी, भस्कुरा और दर्री में एक सप्ताह के भीतर नए हैंडपंप स्थापित करने के निर्देश लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को दिए।
कार्यक्रम के दौरान विधायक ने कहा कि सरकार गांव स्तर तक सेवाएं पहुंचाने और शिकायतों के समाधान के लिए ऐसे शिविर आयोजित कर रही है ताकि नागरिकों को दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। लेकिन शिविर की सबसे चर्चित घटना तब सामने आई जब ग्राम पंचायत मगुरदा से जुड़ा एक पुराना मामला चर्चा में आया। शिकायत के अनुसार एक जीवित व्यक्ति को मृत बताकर फौती नामांतरण से जुड़ा प्रस्ताव पारित किया गया था। इस मामले पर कलेक्टर ने कहा कि यदि संबंधित व्यक्ति तहसील स्तर के निर्णय से संतुष्ट नहीं है तो अपील का अधिकार उपलब्ध है। साथ ही संबंधित पंचायत के सरपंच और सचिव के खिलाफ तत्काल कार्रवाई के निर्देश जिला पंचायत सीईओ को दिए गए।
शिविर में स्वास्थ्य जांच, आयुष्मान कार्ड, ई-केवाईसी, श्रमिक पंजीयन, आजीविका समूह उत्पाद प्रदर्शनी और विभिन्न योजनाओं के लाभ वितरण जैसी गतिविधियां भी संचालित की गईं। चार गर्भवती महिलाओं की गोदभराई, पांच बच्चों का अन्नप्राशन और किसानों को राजस्व दस्तावेज वितरण भी किया गया। इसके अलावा नल-जल योजना के पूर्णता प्रमाण पत्र, प्लंबरों को नियुक्ति पत्र, पीएम आवास की चाबी, बीज, लर्निंग लाइसेंस और अन्य योजनाओं के प्रमाण पत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम के अंत में बाल विवाह मुक्त जिला बनाने की शपथ भी दिलाई गई। अब देखने वाली बात यह होगी कि शिविर में दिए गए निर्देश और घोषणाएं तय समय में जमीन पर उतरती हैं या नहीं।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
1. जीवित व्यक्ति को मृत बताकर प्रस्ताव पारित होने जैसी गंभीर त्रुटि कैसे हुई और इस मामले में प्रशासनिक जवाबदेही किस स्तर तक तय की जाएगी?
2. सुशासन तिहार के पिछले शिविरों में प्राप्त शिकायतों में से कितने मामलों का स्थायी समाधान हुआ और कितने दोबारा सामने आए?
3. एक सप्ताह में हैंडपंप लगाने की घोषणा हुई है—क्या इसके लिए बजट, तकनीकी स्वीकृति और कार्य आदेश पहले से तैयार हैं या यह केवल आश्वासन है?