जगदलपुर; जहां दफ्तर नहीं पहुंचे, वहां पहुंचा प्रशासन… घाटलोहंगा में लगा समाधान का गांव Aajtak24 News

जगदलपुर; जहां दफ्तर नहीं पहुंचे, वहां पहुंचा प्रशासन… घाटलोहंगा में लगा समाधान का गांव Aajtak24 News

जगदलपुर - बस्तर के दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों तक प्रशासन और योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आदि सेवा केंद्र घाटलोहंगा में जनजातीय गरिमा उत्सव के तहत ‘बस्तर मुन्ने’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ‘सबसे दूर, सबसे पहले’ की थीम पर आयोजित इस अभियान में प्रशासनिक अमला गांव तक पहुंचा और ग्रामीणों की समस्याओं को मौके पर सुनकर समाधान देने का प्रयास किया गया। ग्राम पंचायत भवन परिसर में आयोजित इस विशेष शिविर का उद्देश्य केवल योजनाओं की जानकारी देना नहीं बल्कि सरकारी सेवाओं को सीधे अंतिम छोर तक पहुंचाना रहा। शिविर में विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे, जिन्होंने ग्रामीणों से संवाद कर समस्याओं का निराकरण किया।

राजस्व विभाग से जुड़े मामलों में मौके पर समाधान सबसे प्रमुख गतिविधियों में शामिल रहा। ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत प्रकरणों पर तत्काल कार्रवाई की गई, जिससे लोगों को स्थानीय स्तर पर राहत मिली। वहीं स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शिविर में पहुंचे लोगों की जांच कर निःशुल्क दवाइयों का वितरण किया। कृषि विभाग ने किसानों को विभागीय योजनाओं और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दी। इसके अलावा कार्यक्रम को केवल प्रशासनिक गतिविधि तक सीमित न रखते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया। आंगनबाड़ी परिसर के पास वृक्षारोपण कर आम का पौधा लगाया गया।

कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्राम स्तरीय कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। आयोजन को जनभागीदारी आधारित मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसमें ग्रामीणों को प्रशासन के साथ सीधे जोड़ने का प्रयास किया गया। अभियान से जुड़े अधिकारियों के अनुसार यह कार्यक्रम 18 मई से शुरू होकर 25 मई तक संचालित किया जा रहा है और क्षेत्र के लोगों से अधिक से अधिक संख्या में इसमें शामिल होने की अपील की गई है।

हालांकि शिविरों में तत्काल समाधान की बात कही जा रही है, लेकिन वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि शिविर के बाद लंबित समस्याओं का समाधान कितनी तेजी और स्थायित्व के साथ होता है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

1. ‘सबसे दूर, सबसे पहले’ अभियान के तहत अब तक कितने आवेदनों का स्थायी समाधान हुआ और कितने मामले अभी भी लंबित हैं?

2. जिन जनजातीय क्षेत्रों में शिविर लगाए जा रहे हैं, वहां स्वास्थ्य, शिक्षा और राजस्व सेवाओं की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए स्थायी व्यवस्था क्या है?

3. शिविर समाप्त होने के बाद ग्रामीणों की शिकायतों और योजनाओं की प्रगति की निगरानी कौन करेगा और उसकी जवाबदेही कैसे तय होगी?

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