| गौरेला-पेंड्रा; जहां नेटवर्क भी मुश्किल से पहुंचता है, वहां पहुंचा प्रशासन: आमाडोब शिविर में ग्रामीणों ने खुलकर रखीं समस्याएं |
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही - जिले के बैगा बहुल और दूरस्थ वनांचल क्षेत्र आमाडोब में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर ग्रामीणों के लिए उम्मीद का मंच बनकर सामने आया। जंगल और पहाड़ी इलाकों से बड़ी संख्या में पहुंचे ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं प्रशासन के सामने रखीं, वहीं अधिकारियों ने मौके पर ही कई मामलों के समाधान की प्रक्रिया शुरू की। शिविर में शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देने के साथ पात्र हितग्राहियों को लाभ भी वितरित किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रणव कुमार मरपची ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और मॉडल प्रदेश के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है, इसी उद्देश्य से दूरस्थ क्षेत्रों में शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।
संतोष कुमार देवांगन ने शिविर में प्राप्त आवेदनों की विभागवार समीक्षा करते हुए अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। जिला पंचायत सदस्य भंवर सिंह गोवस द्वारा मोबाइल टॉवर लगाने की मांग उठाए जाने पर कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए। वहीं तरईगांव के सरपंच द्वारा सीमांकन और निस्तारी मार्ग से अतिक्रमण हटाने की मांग पर एसडीएम को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया।
शिविर में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने ग्रामीणों को योजनाओं की जानकारी दी और आवेदन की स्थिति से अवगत कराया। इस दौरान बड़ी संख्या में हितग्राहियों को सरकारी योजनाओं का लाभ भी दिया गया। सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यक्रमों के तहत गर्भवती महिलाओं की गोदभराई और बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार भी कराया गया, जिससे कार्यक्रम में आत्मीय माहौल देखने को मिला।
इस शिविर में खोडरी, बढ़ावनडांड, ठेंगाडांड, गौरखेड़ा, पीपरखुंटी, केंवची, आमाडोब, देवरगांव, पड़वनिया, ठाड़पथरा, तरईगांव, पकरिया, भदोरा, ललाती, धनगवा, पतरकोनी, जोगीसार, सधवानी, बनझोरका और नेवरीनवापारा सहित 20 ग्राम पंचायतों के ग्रामीण शामिल हुए। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने विभागीय स्टॉलों का निरीक्षण कर योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी ली।
कार्यक्रम में ग्रीष्मी चांद, मुकेश रावटे, समीरा पैकरा, पवन पैकरा, शिवनाथ बघेल और विक्रांत अंचल सहित कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। ग्रामीणों का कहना है कि दूरस्थ इलाकों में इस तरह के शिविरों से प्रशासन और जनता के बीच दूरी कम हो रही है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- आमाडोब जैसे दूरस्थ बैगा बहुल क्षेत्रों में आज भी मोबाइल नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग उठ रही है, तो क्या यह विकास मॉडल की जमीनी हकीकत पर सवाल नहीं खड़ा करता?
- जनसमस्या निवारण शिविरों में आवेदन तो लिए जा रहे हैं, लेकिन क्या प्रशासन यह सार्वजनिक करेगा कि पिछली शिविरों में मिले कितने आवेदनों का वास्तव में समाधान हुआ?
- बैगा बहुल वनांचल क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं की स्थिति अब भी कमजोर है, तो क्या सरकार के पास इन इलाकों के लिए कोई अलग दीर्घकालिक विकास नीति है या शिविर ही मुख्य समाधान बने रहेंगे?