| जगदलपुर; सुशासन तिहार में विकास की ‘डबल सौगात’: पारापुर को मिले करोड़ों के काम |
जगदलपुर - सुशासन तिहार 2026 के तहत लोहंडीगुड़ा विकासखंड के ग्राम पारापुर में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर विकास और प्रशासनिक सक्रियता का बड़ा मंच बनकर सामने आया। शिविर के दौरान एक करोड़ 56 लाख 49 हजार रुपए की लागत के विभिन्न निर्माण कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया गया, जबकि प्रधानमंत्री सड़क योजना के अंतर्गत 32 करोड़ 21 लाख रुपए की लागत वाली सड़क परियोजनाओं की भी शुरुआत की गई।
प्रशासन का दावा है कि इन सड़क परियोजनाओं से पारापुर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन बेहतर होगा और विकास को नई गति मिलेगी। कार्यक्रम में पहुंचे ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में अपनी समस्याएं और मांगें प्रशासन के सामने रखीं। शिविर में कुल 235 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 140 मामलों का मौके पर ही निराकरण कर दिया गया। शेष लंबित आवेदनों को तय समयसीमा में हल करने के निर्देश संबंधित विभागों को दिए गए हैं।
शिविर के दौरान विभिन्न विभागों ने हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ भी वितरित किया। कृषि विभाग द्वारा किसानों को उन्नत बीज और कृषि पंप दिए गए, जबकि लैम्पस के माध्यम से किसान क्रेडिट कार्ड वितरित किए गए। मत्स्य विभाग ने हितग्राहियों को जाल प्रदान किए और स्वास्थ्य विभाग की ओर से आयुष्मान कार्ड वितरित किए गए।
महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत कई महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ योजना से जोड़ा गया। वहीं महिला एवं बाल विकास विभाग ने गोदभराई और अन्नप्राशन कार्यक्रम आयोजित कर सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता का संदेश भी दिया।
कार्यक्रम में विनायक गोयल, बलदेव मंडावी, पदमा कश्यप, बसंत कश्यप और चंद्रभान कश्यप सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि करोड़ों रुपए के इन विकास कार्यों से आने वाले समय में पारापुर और आसपास के गांवों की तस्वीर बदलने वाली है।
ग्रामीणों का कहना है कि पहली बार इतने बड़े स्तर पर गांव में विकास कार्यों की घोषणा और समस्याओं के त्वरित समाधान की प्रक्रिया देखने को मिली है। हालांकि लोगों ने यह भी उम्मीद जताई कि घोषणाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें और तय समय में धरातल पर दिखाई दें।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- 235 आवेदनों में से केवल 140 का ही मौके पर समाधान हो पाया, तो क्या प्रशासन यह बताएगा कि बाकी लंबित मामलों के निपटारे की स्पष्ट समयसीमा और मॉनिटरिंग व्यवस्था क्या है?
- 32 करोड़ रुपए की सड़क परियोजनाओं का भूमिपूजन तो हुआ, लेकिन क्या इन परियोजनाओं के लिए कार्य प्रारंभ और पूर्ण होने की ठोस समयसीमा सार्वजनिक की जाएगी ताकि जनता प्रगति पर नजर रख सके?
- सुशासन शिविरों में योजनाओं का लाभ बांटने के बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन क्या प्रशासन के पास यह आंकड़ा है कि पिछले वर्षों में लाभ पाने वाले कितने हितग्राही वास्तव में आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन पाए?