एमसीबी; बारिश से पहले प्रशासन की दौड़: कलेक्टर ने कहा— 15 जून तक हर हाल में पूरे हों जल संरक्षण के काम

एमसीबी; बारिश से पहले प्रशासन की दौड़: कलेक्टर ने कहा— 15 जून तक हर हाल में पूरे हों जल संरक्षण के काम

एमसीबी - ग्रामीण विकास और जल संरक्षण कार्यों को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। संतन देवी जांगड़े और अंकिता सोम ने विभिन्न ग्राम पंचायतों का दौरा कर मनरेगा के तहत चल रहे विकास कार्यों का निरीक्षण किया और अधिकारियों को समयसीमा में कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। प्रशासनिक टीम ने ग्राम पंचायत सिरौली, सीरिया खोह, चिराईपानी, लोहारी और लाई में पहुंचकर जमीनी स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने डबरी निर्माण, कंटूर ट्रेंच, स्टॉप डैम, सार्वजनिक रिचार्ज पिट, सार्वजनिक कुएं, शौचालय और महतारी सदन जैसे कार्यों की प्रगति की समीक्षा की।

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि मानसून शुरू होने से पहले जल संरक्षण से जुड़े सभी कार्य 15 जून तक हर हाल में पूरे कर लिए जाएं। उन्होंने कहा कि यदि समय पर निर्माण कार्य पूरे नहीं हुए तो वर्षा जल संचयन का उद्देश्य प्रभावित हो सकता है। कलेक्टर ने गुणवत्ता पर भी विशेष जोर देते हुए तकनीकी अमले को निर्माण कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग करने को कहा। प्रशासन का मानना है कि डबरी, कंटूर ट्रेंच और रिचार्ज पिट जैसे कार्य ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट कम करने के साथ कृषि और आजीविका को मजबूत करने में मददगार साबित होंगे। वहीं ग्रामीण बुनियादी ढांचे से जुड़े निर्माण कार्यों के जरिए गांवों में सुविधाएं बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है।

निरीक्षण के दौरान स्थानीय एसडीएम, जनपद पंचायत सीईओ, कार्यक्रम अधिकारी और विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर श्रमिकों और ग्रामीणों से भी चर्चा कर कार्यों की प्रगति और समस्याओं की जानकारी ली। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर जल संरक्षण कार्य पूरे हो जाते हैं तो आने वाले बारिश के मौसम में जल स्तर सुधारने और खेती को लाभ मिलने की उम्मीद बढ़ेगी। हालांकि कई गांवों में अब भी अधूरे कार्यों और धीमी प्रगति को लेकर लोगों में चिंता बनी हुई है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. हर साल मानसून से पहले जल संरक्षण कार्यों को प्राथमिकता देने की बात होती है, फिर भी कई योजनाएं समय पर पूरी क्यों नहीं हो पातीं? जिम्मेदारी किसकी तय होती है?
  2. मनरेगा के तहत बनाए जा रहे डबरी, स्टॉप डैम और रिचार्ज पिट की गुणवत्ता की निगरानी के लिए क्या कोई स्वतंत्र ऑडिट या सोशल मॉनिटरिंग व्यवस्था है?
  3. क्या प्रशासन के पास ऐसा डेटा है जिससे साबित हो कि पिछले वर्षों में बने जल संरक्षण ढांचों से वास्तव में भूजल स्तर और किसानों की आय में सुधार हुआ है?

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