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| दतिया कलेक्टर बोले — माहवारी स्वच्छता को बनाना होगा जनआंदोलन |
दतिया - माहवारी को लेकर समाज में बनी चुप्पी और झिझक को तोड़ने के लिए दतिया में एक बड़ा जागरूकता अभियान शुरू किया गया। ग्लोबल माहवारी स्वच्छता दिवस के अवसर पर कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा “बाला” कार्यक्रम के तहत जिला स्तरीय मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण आयोजित किया गया, जिसमें माहवारी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने कहा कि माहवारी स्वच्छता को अब जनआंदोलन बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर समाज में खुलकर चर्चा होनी चाहिए ताकि महिलाओं और किशोरियों को सुरक्षित एवं सम्मानजनक माहवारी प्रबंधन का वातावरण मिल सके।
कलेक्टर ने निर्देश दिए कि “बाला किट” सबसे पहले उन जरूरतमंद बालिकाओं और महिलाओं तक पहुंचाई जाए जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा आवश्यकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि कम से कम छह माह तक किट के उपयोग का नियमित फॉलोअप किया जाए, ताकि यह पता चल सके कि किट का उपयोग सही तरीके से हो रहा है या नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि जो मैदानी अमला इस अभियान में गंभीरता से कार्य करेगा, उसका कलेक्ट्रेट स्तर पर सम्मान किया जाएगा। कार्यक्रम में जिला कार्यक्रम अधिकारी अरविंद उपाध्याय, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. वर्मा सहित बड़ी संख्या में सीडीपीओ, बीएमओ, एएनएम, आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
“बाला” कार्यक्रम के अंतर्गत मास्टर ट्रेनर श्रद्धा जादौन और पिंकी चौहान ने प्रतिभागियों को बाला किट के उपयोग, रखरखाव और स्वास्थ्य संबंधी लाभों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एक महिला अपने जीवनकाल में लगभग 8 से 10 हजार डिस्पोजेबल पैड्स का उपयोग करती है, जो सैकड़ों वर्षों तक पर्यावरण में कचरे के रूप में बने रहते हैं। इसके विपरीत “बाला” के पुनः उपयोग किए जाने वाले इको-फ्रेंडली पैड्स 2 से 3 वर्षों तक इस्तेमाल किए जा सकते हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी। कार्यक्रम में शक्ति शाली महिला संगठन समिति के प्रतिनिधि रवि गोयल ने प्रशासन का आभार जताते हुए कहा कि हर घर और कार्यालय को “पीरियड फ्रेंडली” बनाने की दिशा में काम करना समय की जरूरत है। कार्यक्रम में 300 से अधिक मास्टर ट्रेनर्स ने प्रशिक्षण प्राप्त किया और माहवारी स्वच्छता तथा महिला स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- जब माहवारी स्वच्छता को जनआंदोलन बनाने की बात हो रही है, तो आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में किशोरियां सुरक्षित सैनिटरी उत्पादों से वंचित क्यों हैं?
- क्या सरकार स्कूलों, पंचायतों और सरकारी संस्थानों को ‘पीरियड फ्रेंडली’ बनाने के लिए कोई अनिवार्य नीति लागू करने जा रही है?
- ‘बाला किट’ वितरण के बाद क्या प्रशासन यह सार्वजनिक करेगा कि कितनी महिलाओं ने वास्तव में इसका नियमित उपयोग किया और उसका स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ा?
