अनुपपुर में प्रशासनिक सर्जरी: बच्चों के एडमिशन से लेकर नल-जल तक हर विभाग पर कलेक्टर की सीधी नजर Aajtak24 News

अनुपपुर में प्रशासनिक सर्जरी: बच्चों के एडमिशन से लेकर नल-जल तक हर विभाग पर कलेक्टर की सीधी नजर Aajtak24 News

अनुपपुर - हर्षल पंचोली ने जिले की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर बड़ा संदेश देते हुए अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि अब योजनाओं की समीक्षा केवल बैठकों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अधिकारी गांव-गांव जाकर जमीनी हकीकत जांचेंगे। विद्यार्थियों के शत-प्रतिशत नामांकन से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था, किसानों के कल्याण और लंबित शिकायतों के निराकरण तक हर विभाग को सख्त समयसीमा में काम करने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्ट्रेट के नर्मदा सभागार में आयोजित समयावधि पत्रों की समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने शिक्षा विभाग को विशेष प्राथमिकता देते हुए कहा कि जिले में एक माह का विस्तृत फील्ड विजिट प्लान तैयार किया जाए। अधिकारियों को सेक्टरवार गांवों में जाकर ऐसे बच्चों की पहचान करने के निर्देश दिए गए जो अभी तक स्कूलों में नामांकित नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा कि केवल आंकड़े प्रस्तुत करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि अभिभावकों से संवाद स्थापित कर बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करना भी अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी। इस अभियान में जिला और जनपद स्तर के अधिकारियों की ड्यूटी लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

बैठक में कलेक्टर ने चाइल्ड ट्रैकिंग एप के माध्यम से विद्यार्थियों की निगरानी पर भी जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए और इसके लिए प्रशासनिक मशीनरी को सक्रिय रूप से फील्ड में उतरना होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट को लेकर भी बैठक में गंभीर चर्चा हुई। कलेक्टर ने नल-जल योजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि जल दर्पण एप्लीकेशन के माध्यम से योजनाओं की रियल टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसके साथ ही सार्वजनिक स्थलों और सरकारी परिसरों में प्याऊ लगाने के भी निर्देश दिए गए।

कृषि विभाग की समीक्षा के दौरान राज्य शासन द्वारा घोषित कृषक कल्याण वर्ष को लेकर भी प्रशासनिक तैयारियों की समीक्षा की गई। कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि किसानों को आधुनिक खेती की तकनीकों से जोड़ने के लिए गांव स्तर पर अभियान चलाए जाएं। बाइक रैली, ट्रैक्टर रैली और प्रशिक्षण शिविरों के माध्यम से किसानों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने के लिए किसानों को प्रेरित करने पर विशेष जोर दिया। बैठक में सीएम हेल्पलाइन के लंबित मामलों को लेकर भी कलेक्टर का सख्त रवैया देखने को मिला। हैंडपंप मरम्मत, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, राशन कार्ड अपडेट, लाड़ली बहना योजना के लंबित भुगतान, भूमि सीमांकन और अवैध कब्जों से संबंधित शिकायतों की विस्तृत समीक्षा की गई। कलेक्टर ने अधिकारियों को चेतावनी भरे अंदाज में निर्देश दिए कि शिकायतों के निराकरण में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

पंचायती राज विभाग के अंतर्गत पाइपलाइन टूटने, मोटर जलने और जलप्रदाय से जुड़ी समस्याओं पर भी अधिकारियों से जवाब तलब किया गया। इसके अलावा संबल पंजीयन, समग्र आईडी और शासकीय भूमि पर अतिक्रमण जैसे मामलों की समीक्षा करते हुए लंबित प्रकरणों का समय सीमा में निराकरण सुनिश्चित करने को कहा गया। खाद्य विभाग की समीक्षा के दौरान जिले की उचित मूल्य दुकानों में खाद्यान्न उपलब्धता की जानकारी ली गई। कलेक्टर ने राशन दुकानों का आकस्मिक निरीक्षण करने और वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाए रखने के निर्देश दिए। वहीं विद्यार्थियों को समय पर पाठ्यपुस्तक वितरण और जर्जर सरकारी भवनों के स्थान पर नए भवन निर्माण की प्रक्रिया तेज करने को भी कहा गया।

बैठक में शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना की भी समीक्षा की गई। इस योजना के तहत पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को पुलिस एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए 45 दिवसीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रशिक्षण कार्यक्रम को केवल औपचारिकता न बनाया जाए, बल्कि इसे परिणामोन्मुखी ढंग से संचालित किया जाए ताकि युवाओं को वास्तविक लाभ मिल सके।बैठक में जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी अर्चना कुमारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासनिक सख्ती और जमीनी निगरानी को लेकर हुई इस बैठक के बाद अब जिले में अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी नजरें टिक गई हैं।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. जब हर साल “शत-प्रतिशत नामांकन अभियान” चलाया जाता है, तो फिर जिले में अब भी स्कूल से बाहर बच्चों की संख्या क्यों बनी हुई है? क्या पूर्व के अभियानों की मॉनिटरिंग केवल कागजों तक सीमित रही?
  2. जल दर्पण एप से रियल टाइम मॉनिटरिंग की बात की जा रही है, लेकिन क्या प्रशासन यह सार्वजनिक करेगा कि जिले की कितनी नल-जल योजनाएं वर्तमान में बंद या आंशिक रूप से संचालित हैं?
  3. सीएम हेल्पलाइन में वर्षों से लंबित शिकायतों पर बार-बार समीक्षा बैठकों के बावजूद समाधान नहीं हो पा रहा। क्या खराब प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय कर कोई कार्रवाई भी होगी या सिर्फ निर्देश जारी होते रहेंगे?

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