सीधी; डिस्प्ले बोर्ड गायब देख कलेक्टर भड़के, तहसील में हेल्पडेस्क के आदेश Aajtak24 News

सीधी; डिस्प्ले बोर्ड गायब देख कलेक्टर भड़के, तहसील में हेल्पडेस्क के आदेश Aajtak24 News

सीधी - जिले के मझौली उपखंड में गुरुवार को कलेक्टर विकास मिश्रा ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत जानने के लिए विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने तहसील कार्यालय, जनपद पंचायत, स्वास्थ्य सेवाओं और जनगणना कार्यों की गहन समीक्षा की। तहसील कार्यालय के निरीक्षण में कलेक्टर को लोकसेवा गारंटी अधिनियम के तहत लगाया जाने वाला डिस्प्ले बोर्ड अनुपस्थित मिला, जिस पर उन्होंने नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि आम नागरिकों को सेवाओं, समय-सीमा और प्रक्रिया की पूरी जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध होनी चाहिए, इसलिए डिस्प्ले बोर्ड तत्काल लगाया जाए। साथ ही नागरिकों की सहायता के लिए तहसील कार्यालय में हेल्पडेस्क स्थापित करने के निर्देश भी दिए गए।

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने कर्मचारियों से सीधा संवाद कर शासकीय कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्धता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जनता से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और प्रत्येक कर्मचारी को संवेदनशील होकर कार्य करना होगा।

जनगणना कार्य की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने प्रगणकों और सुपरवाइजरों से कार्य की प्रगति की जानकारी ली। निरीक्षण में कुछ कमियां पाए जाने पर संबंधित कर्मचारियों को चेतावनी देते हुए कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्य में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके बाद कलेक्टर ने जनपद पंचायत मझौली की विभिन्न शाखाओं का निरीक्षण किया, जहां रिकॉर्ड संधारण व्यवस्था को संतोषजनक पाया गया। उन्होंने रिकॉर्ड रूम को और अधिक आधुनिक एवं व्यवस्थित बनाने के निर्देश दिए।

अस्पताल निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने स्वास्थ्य सेवाओं, साफ-सफाई, दवाओं की उपलब्धता और मरीजों को दी जा रही सुविधाओं का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मरीजों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित की जाएं। निरीक्षण के दौरान एसडीएम आर.पी. त्रिपाठी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. तहसील कार्यालय में डिस्प्ले बोर्ड जैसे बुनियादी प्रावधान पहले से क्यों नहीं लगाए गए, क्या यह लगातार प्रशासनिक लापरवाही का संकेत है?
  2. जनगणना जैसे राष्ट्रीय कार्य में लापरवाही पाए जाने पर केवल नोटिस की कार्रवाई पर्याप्त है या जिम्मेदारी तय कर कठोर दंडात्मक कदम भी होंगे?
  3. स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के निर्देश तो दिए जाते हैं, लेकिन क्या अस्पतालों में डॉक्टर, दवा और संसाधनों की कमी को दूर करने के लिए कोई स्थायी निगरानी तंत्र बनाया गया है?

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