अंबिकापुर; आंगनबाड़ी सिस्टम पर सख्ती: कलेक्टर ने बैठाई ‘डेडलाइन मीटिंग Aajtak24 News

अंबिकापुर; आंगनबाड़ी सिस्टम पर सख्ती: कलेक्टर ने बैठाई ‘डेडलाइन मीटिंग Aajtak24 News

अंबिकापुर - अंबिकापुर में महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान कलेक्टर श्री अजीत वसंत ने विभागीय कार्यों की गहन समीक्षा करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं की लंबित नियुक्तियां एक माह के भीतर हर हाल में पूरी की जाएं। विशेष रूप से लखनपुर और बतौली परियोजनाओं में इस कार्य को प्राथमिकता देने को कहा गया। बैठक में कलेक्टर ने विभागीय योजनाओं की धीमी प्रगति पर असंतोष जताते हुए सभी प्रमुख संकेतकों (इंडिकेटर्स) में सुधार लाने के निर्देश दिए।

योजनाओं पर विशेष फोकस

कलेक्टर ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत पंजीयन के बाद करेक्शन और निराकरण में आ रही समस्याओं को तुरंत हल करने पर जोर दिया। साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों की मैपिंग में आ रही दिक्कतों पर जिला कार्यक्रम अधिकारी को CMHO और संबंधित सचिवों से समन्वय करने के निर्देश दिए। महतारी वंदन योजना के अंतर्गत केवाईसी कार्य को तेजी से पूरा करने और APAR व ABHA आईडी निर्माण में प्रगति लाने को भी कहा गया।

पोषण और बच्चों पर फोकस

कलेक्टर ने कुपोषण उन्मूलन को प्राथमिकता बताते हुए निर्देश दिए कि—

  • रेडी-टू-ईट और मिलेट आधारित पोषण आहार समय पर वितरित हो
  • गर्भवती महिलाओं को पोषण सामग्री समय से मिले
  • हर परियोजना से कम से कम 5 बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) भेजा जाए

आंगनबाड़ी निरीक्षण अनिवार्य

बैठक में निर्देश दिया गया कि परियोजना अधिकारी और सुपरवाइजर नियमित रूप से आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण करें और व्यवस्थाओं की सतत निगरानी सुनिश्चित करें।

दत्तक ग्रहण मामलों में सख्ती

मातृ छाया योजना के तहत दत्तक ग्रहण (एडॉप्शन) मामलों में कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि—

  • अभिभावकों की उपस्थिति अनिवार्य होगी
  • परिवार की सामाजिक और आर्थिक स्थिति की जांच जरूरी होगी

यह जिम्मेदारी बाल संरक्षण अधिकारी को सौंपी गई।

प्रशासन का रुख

कलेक्टर ने कहा कि विभागीय योजनाओं का असली उद्देश्य पात्र हितग्राहियों तक वास्तविक लाभ पहुंचाना है, इसलिए सभी अधिकारी समन्वय के साथ काम करें और लक्ष्य समय पर पूरे करें।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सीधे सवाल

  1. आंगनबाड़ी नियुक्तियों में बार-बार देरी क्यों हो रही है—क्या यह प्रशासनिक ढांचे की कमजोरी है या भर्ती प्रक्रिया में सिस्टम स्तर पर गड़बड़ी?
  2. पोषण योजनाओं के बावजूद कुपोषण रोकने के लिए हर परियोजना से केवल 5 बच्चों को NRC भेजने का लक्ष्य क्या वास्तव में समस्या की गंभीरता को दर्शाता है या यह आंकड़ों की औपचारिकता है?
  3. दत्तक ग्रहण मामलों में सामाजिक-आर्थिक जांच पर जोर के बावजूद कई केस लंबे समय तक लंबित क्यों रहते हैं—क्या इसमें पारदर्शिता या निगरानी की कमी जिम्मेदार है?

Post a Comment

Previous Post Next Post