गांव की ‘कक्षा’ बनी मिसाल: कछिया पंचायत ने बच्चों के भविष्य को बनाया मॉडल, पूरे प्रदेश में नंबर-1 बनकर रचा इतिहास! Aajtak24 News

गांव की ‘कक्षा’ बनी मिसाल: कछिया पंचायत ने बच्चों के भविष्य को बनाया मॉडल, पूरे प्रदेश में नंबर-1 बनकर रचा इतिहास! Aajtak24 News

बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के वाड्रफनगर जनपद की ग्राम पंचायत कछिया ने बाल हितैषी पंचायत की श्रेणी में प्रदेश में पहला स्थान हासिल कर बड़ा कीर्तिमान स्थापित किया है। पीएआई 2.0 सर्वे के तहत “बाल हितैषी पंचायत” थीम में 95.71 अंक प्राप्त कर इस पंचायत ने पूरे राज्य में अपनी अलग पहचान बनाई है। यह उपलब्धि केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि ग्रामीण स्तर पर जनभागीदारी और सतत प्रयासों का परिणाम मानी जा रही है।

जिला पंचायत सीईओ श्रीमती नयनतारा सिंह तोमर ने इस उपलब्धि को पूरे जिले के लिए गौरवपूर्ण बताते हुए कहा कि यह पंचायत अन्य गांवों के लिए प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि कछिया में जिस तरह शिक्षा, स्वास्थ्य और बाल सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है, वह सतत विकास की दिशा में मजबूत उदाहरण है।

बच्चों के लिए बदला गांव का माहौल

कछिया पंचायत में प्राथमिक और मिडिल स्कूल मिलाकर 155 बच्चे अध्ययनरत हैं। पंचायत ने बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए कई स्तरों पर काम किया है—

  • स्कूल में नियमित उपस्थिति बढ़ाने पर जोर
  • स्वच्छता अभियान और साफ-सुथरा वातावरण
  • हाथ धोने और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था
  • बाल पोषण और स्वास्थ्य पर आंगनबाड़ी के साथ समन्वय
  • ग्रामसभा में बच्चों से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता

 कैसे मिली सफलता?

ग्राम पंचायत ने सिर्फ योजनाएं लागू नहीं कीं, बल्कि जमीनी स्तर पर बदलाव की रणनीति अपनाई—

  • सरपंच और शिक्षकों द्वारा घर-घर संपर्क
  • अभिभावकों को बच्चों की पढ़ाई के लिए प्रेरित करना
  • नियमित स्कूल मॉनिटरिंग और समीक्षा बैठकें
  • स्वच्छता और अनुशासन पर विशेष अभियान
  • ग्रामसभा में सामूहिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना

सामने आई चुनौतियां भी

शुरुआत में पंचायत को कई समस्याओं का सामना करना पड़ा—

  • कई परिवारों में शिक्षा के प्रति कम रुचि
  • मौसमी पलायन से बच्चों की उपस्थिति प्रभावित
  • बरसात में स्कूल पहुंचने में दिक्कत
  • कुछ बच्चों में अनुशासन और आत्मविश्वास की कमी

कैसे दूर की गई चुनौतियां

इन समस्याओं से निपटने के लिए पंचायत ने लगातार प्रयास किए—

  • अभिभावकों से संवाद और प्रेरणा अभियान
  • शिक्षकों के साथ नियमित समीक्षा
  • स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं में सुधार
  • बच्चों के लिए लगातार मार्गदर्शन और प्रोत्साहन

आगे की योजना

पंचायत ने इस मॉडल को स्थायी बनाए रखने के लिए रोडमैप तैयार किया है—

  • हर ग्रामसभा में बच्चों के मुद्दे अनिवार्य एजेंडा
  • स्कूलों की नियमित निगरानी
  • शत-प्रतिशत नामांकन और ड्रॉपआउट खत्म करने का लक्ष्य
  • स्वास्थ्य और पोषण योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन
  • सुरक्षित और बाल अनुकूल वातावरण बनाए रखना

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सीधे सवाल

  1. जब कछिया पंचायत को 95+ अंक मिल रहे हैं, तो क्या यह स्वीकार किया जाएगा कि अन्य पंचायतों में बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा की स्थिति अभी भी गंभीर रूप से कमजोर है?
  2. शत-प्रतिशत नामांकन और “शून्य ड्रॉपआउट” का लक्ष्य कागज पर कैसे संभव हुआ, जबकि अभी भी कई क्षेत्रों में पलायन और स्कूल छोड़ने की समस्या बनी हुई है?
  3. क्या इस मॉडल को स्थायी बनाने के लिए बजट और संसाधनों की ठोस गारंटी है, या यह सफलता केवल “अच्छे प्रदर्शन वाली कुछ पंचायतों” तक ही सीमित रह जाएगी?

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