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| नर्मदापुरम; पानी, नाले और आवारा कुत्तों तक पर प्रशासन की नजर… शहर में चल रहे कामों की खुली हकीकत Aajtak24 News |
नर्मदापुरम - शहर में चल रही अधोसंरचना परियोजनाओं की प्रगति और गुणवत्ता की जांच के लिए प्रशासन ने मैदानी निरीक्षण तेज कर दिए हैं। कलेक्टर श्री सोमेश मिश्रा के निर्देश पर गुरुवार को सिटी मजिस्ट्रेट श्री देवेंद्र प्रताप सिंह और मुख्य नगर पालिका अधिकारी श्रीमती हेमेश्वरी पटले ने शहर की विभिन्न निर्माणाधीन परियोजनाओं का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने अमृत योजना के तहत निर्माणाधीन जलापूर्ति संरचना का अवलोकन किया। इस दौरान परियोजना की प्रगति, निर्माण गुणवत्ता और कार्य की गति की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए कि कार्य समय-सीमा के भीतर पूरा किया जाए और गुणवत्ता मानकों से किसी प्रकार का समझौता न हो।
इसके बाद मुख्यमंत्री शहरी अधोसंरचना विकास योजना के अंतर्गत बनाए जा रहे नालों का भी निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने निर्माण कार्यों की स्थिति देखी और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। बरसात के मौसम को देखते हुए प्रशासन विशेष रूप से जल निकासी व्यवस्था को लेकर सतर्क नजर आया।
निरीक्षण के दौरान सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत बनाए जा रहे आवारा स्वान आश्रय स्थल का भी जायजा लिया गया। अधिकारियों ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि स्वान प्रबंधन से जुड़े सभी कार्य निर्धारित मानकों और समय-सीमा के अनुसार पूरे किए जाएं, ताकि शहर में आवारा कुत्तों की समस्या को नियंत्रित किया जा सके।
प्रशासन का कहना है कि शहर में चल रही विकास परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी और किसी भी प्रकार की लापरवाही या घटिया निर्माण पाए जाने पर संबंधित एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण के दौरान अन्य विभागीय अधिकारी भी मौजूद रहे।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- अमृत योजना और नाला निर्माण जैसी परियोजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद शहर में हर बरसात में जलभराव की समस्या क्यों बनी रहती है?
- क्या निर्माण कार्यों की गुणवत्ता जांच केवल निरीक्षण तक सीमित है, या घटिया निर्माण पाए जाने पर ठेकेदारों की जवाबदेही तय कर ब्लैकलिस्ट जैसी कार्रवाई भी होगी?
- आवारा स्वान आश्रय स्थल बनने के बाद उसकी नियमित देखरेख, फंडिंग और संचालन की जिम्मेदारी किस विभाग की होगी, ताकि यह परियोजना केवल कागजों तक सीमित न रह जाए?
