देवास; सूखते जलस्रोतों को बचाने की कवायद… अब गांव-गांव होगा श्रमदान और जल पहरेदारी Aajtak24 News

देवास; सूखते जलस्रोतों को बचाने की कवायद… अब गांव-गांव होगा श्रमदान और जल पहरेदारी Aajtak24 News

देवास - जिले में जल संकट और घटते पारंपरिक जल स्रोतों को बचाने के लिए प्रशासन ने “जल गंगा संवर्धन अभियान” को जन आंदोलन बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्रीमती ज्योति शर्मा ने बुधवार को जन अभियान परिषद की बैठक लेकर अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा की और अधिकारियों तथा सामाजिक संगठनों को जनभागीदारी बढ़ाने के निर्देश दिए। बैठक का मुख्य उद्देश्य जिले की पारंपरिक जल संरचनाओं जैसे कुएं, बावड़ियां, तालाब और नदियों के संरक्षण एवं पुनरुद्धार में आम नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करना था। सीईओ जिला पंचायत ने गैर सरकारी संस्थाओं और संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि जल संरक्षण को केवल सरकारी योजना न मानकर सामाजिक अभियान के रूप में आगे बढ़ाया जाए।

उन्होंने कहा कि जल स्रोतों की साफ-सफाई, संरक्षण और आसपास पौधरोपण जैसे कार्यों में ग्रामीणों और शहरी नागरिकों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। इसके लिए गांवों और नगरों के वार्ड स्तर पर विभिन्न जनजागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएं तथा लोगों को सामूहिक श्रमदान के लिए प्रेरित किया जाए। बैठक में यह भी तय किया गया कि अभियान के तहत खेत तालाब निर्माण, रिचार्ज पिट और चेक डैम गहरीकरण जैसे कार्य लगातार जारी रखे जाएंगे। प्रशासन का मानना है कि जल संरक्षण के इन उपायों से भूजल स्तर सुधारने और भविष्य में जल संकट कम करने में मदद मिलेगी।

सीईओ श्रीमती ज्योति शर्मा ने कहा कि जल संरक्षण केवल वर्तमान की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा विषय है। इसलिए समाज के हर वर्ग को इस अभियान से जोड़ना आवश्यक है। बैठक में जन अभियान परिषद, मनरेगा और स्वच्छ भारत मिशन से जुड़े अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. हर साल जल संरक्षण अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन जिले में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है—क्या प्रशासन के पास इन अभियानों के वास्तविक प्रभाव का कोई सार्वजनिक डेटा है?
  2. कई जगह तालाब, बावड़ियां और जल संरचनाएं अतिक्रमण और गंदगी की शिकार हैं, तो क्या प्रशासन इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई और जवाबदेही तय करेगा?
  3. जनभागीदारी और श्रमदान की बात की जा रही है, लेकिन क्या जल संरक्षण कार्यों की तकनीकी गुणवत्ता और दीर्घकालिक रखरखाव की भी कोई स्वतंत्र मॉनिटरिंग व्यवस्था होगी?

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