सतना; कलेक्टर खुद पहुंचे दूर-दराज गांवों तक! पानी, पोषण और उपार्जन व्यवस्था की खुली जमीनी हकीकत Aajtak24 News

सतना; कलेक्टर खुद पहुंचे दूर-दराज गांवों तक! पानी, पोषण और उपार्जन व्यवस्था की खुली जमीनी हकीकत Aajtak24 News

सतना - जिले के मझगवां क्षेत्र में शुक्रवार को कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने दूरस्थ ग्रामीण अंचलों का सघन दौरा कर स्वास्थ्य, पोषण, पेयजल और गेहूं उपार्जन व्यवस्थाओं की जमीनी स्थिति का निरीक्षण किया। इस दौरान कई स्थानों पर व्यवस्थाओं में खामियां सामने आने पर उन्होंने मौके पर ही अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। कलेक्टर ने गढ़ी घाट ग्राम पंचायत में पेयजल संकट की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए तत्काल समाधान सुनिश्चित करने को कहा। ग्रामीणों की शिकायतों और वास्तविक स्थिति को देखते हुए उन्होंने संबंधित विभाग को त्वरित कार्यवाही के निर्देश दिए, ताकि लोगों को पानी की समस्या से राहत मिल सके।

भ्रमण के दौरान हिरौदी गांव में अति कम वजन वाले बच्चे की स्थिति सामने आने पर कलेक्टर ने स्वास्थ्य विभाग को तत्काल उपचार और नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कुपोषण के मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके अलावा कलेक्टर ने मझगवां स्थित गेहूं मंडी और सहकारी समिति का निरीक्षण कर उपार्जन कार्य की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को पारदर्शिता बनाए रखने और किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी न होने देने के निर्देश दिए।

पोषण पुनर्वास केंद्र के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने सैम (SAM) बच्चों को दी जा रही सेवाओं की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चों के उपचार और पोषण में किसी भी तरह की कमी नहीं होनी चाहिए। दौरे के दौरान एसडीएम, तहसीलदार और जनपद पंचायत सीईओ सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। कलेक्टर ने कहा कि दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की निगरानी लगातार जारी रहेगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सीधे सवाल

  1. दूर-दराज गांवों में पेयजल संकट और कुपोषण के मामले बार-बार सामने आ रहे हैं, तो क्या यह स्वीकार किया जाएगा कि स्थायी समाधान के बजाय केवल निरीक्षणों पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है?
  2. अति कम वजन वाले बच्चों के मामले सामने आने के बावजूद क्या स्वास्थ्य और आंगनबाड़ी व्यवस्था की नियमित मॉनिटरिंग में कोई बड़ी कमी है?
  3. गेहूं उपार्जन केंद्रों में पारदर्शिता की बात की जा रही है, तो क्या किसानों को अब भी भुगतान, तौल या प्रक्रिया में किसी तरह की शिकायतें आ रही हैं, और उनका समाधान कितना प्रभावी है?

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