![]() |
| सीधी; श्रमिकों के लिए योजनाओं की झड़ी या जमीनी बदलाव? सीधी में 1.15 अरब की सहायता Aajtak24 News |
सीधी - जिले में अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए कई बहुआयामी योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी दी गई। मीडिया ब्रीफिंग में अपर कलेक्टर बी.पी. पाण्डेय और श्रम पदाधिकारी आकांक्षा पाठक ने बताया कि जिले में श्रमिकों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और रोजगार से जुड़ी योजनाओं का व्यापक क्रियान्वयन किया जा रहा है। जिले में “श्रमोदय कोचिंग” की शुरुआत की गई है, जिसके तहत संबल योजना और भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कार्डधारी श्रमिकों के बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क कोचिंग दी जा रही है। यह कक्षाएं चुरहट में हर शनिवार आयोजित की जाएंगी।
श्रम विभाग ने बताया कि ग्राम स्तर पर श्रमिकों का पंजीयन और डेटा संकलन मजबूत किया जा रहा है। निर्माण कार्यों में श्रमिकों का अनिवार्य पंजीयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं और श्रम कानूनों का पालन करने वाले संस्थानों को “श्रम स्टार रेटिंग” देने की योजना भी प्रस्तावित है। सामाजिक सुरक्षा के तहत प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना में 60 वर्ष के बाद 3 हजार रुपये मासिक पेंशन का प्रावधान है। जिले में अब तक 213 श्रमिकों का पंजीयन किया गया है। वहीं संबल 2.0 के लंबित मामलों के निराकरण में जिला प्रदेश में चौथे स्थान पर बताया गया है। प्रशासन द्वारा विभिन्न स्थानों पर शिविर लगाकर श्रमिकों को योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। बस स्टैंड, पंचायत स्तर और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य जांच, पंजीयन और लाभ वितरण कार्यक्रम भी चलाए गए हैं।
आंकड़ों के अनुसार जिले में 52,400 भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार पंजीकृत हैं, जिनमें से हजारों हितग्राहियों को 18 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि वितरित की गई है। वहीं संबल योजना के तहत 66 हजार से अधिक पंजीयन और 1 अरब 15 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि दी गई है। बाल श्रम उन्मूलन, श्रम कानूनों के पालन और श्रमिक शिकायतों के निराकरण पर भी प्रशासन ने प्रगति रिपोर्ट पेश की है। अधिकारियों का कहना है कि श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार के लिए लगातार प्रयास जारी हैं।हालांकि जमीनी स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि इतनी बड़ी योजनाओं और राशि वितरण के बावजूद क्या वास्तव में श्रमिकों के जीवन में स्थायी बदलाव दिखाई दे रहा है या फिर लाभ सिर्फ आंकड़ों तक सीमित रह गया है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सीधे सवाल
- 1 अरब 15 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित होने के बावजूद क्या प्रशासन यह साबित कर सकता है कि वास्तव में सभी पात्र श्रमिकों तक योजनाओं का लाभ समान रूप से पहुंचा है?
- श्रमोदय कोचिंग और पंजीयन जैसी योजनाएं शुरू तो हो रही हैं, लेकिन क्या इनका वास्तविक परिणाम यानी रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं में चयन दर का कोई ठोस आंकड़ा उपलब्ध है?
- बाल श्रम उन्मूलन और श्रम कानूनों के पालन के लिए निरीक्षण और कार्रवाई की संख्या काफी कम दिखाई देती है, तो क्या यह मान लिया जाए कि जमीनी स्तर पर निगरानी अभी भी कमजोर है?
