
झाबुआ; बैठकों में दौड़ रही विकास की रफ्तार… लेकिन क्या झाबुआ में समय पर पूरी होंगी अधूरी परियोजनाएं? Aajtak24 News
झाबुआ- झाबुआ में गुरुवार को कलेक्टर योगेश तुकाराम भरसट की अध्यक्षता में जिले में चल रहे निर्माण और अधोसंरचना विकास कार्यों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जल संसाधन, लोक निर्माण विभाग, एमपीआरडीसी, एनएचएआई और अन्य विभागों की परियोजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री विपिन पाटीदार ने जिले में निर्माणाधीन सिंचाई परियोजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि थांदला क्षेत्र में तलावड़ा बांध, झांगर तालाब, राणापुर का कालापान बैराज, झाबुआ का उमरिया वैजंत्री बैराज, रामा का खरडू बैराज और पेटलावद क्षेत्र के कानाकुआं एवं रामगढ़ बैराज निर्माणाधीन हैं।
कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी परियोजनाएं तय समय-सीमा और गुणवत्ता के साथ पूरी हों। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से जिले की सिंचाई क्षमता बढ़ेगी और किसानों को लाभ मिलेगा। समीक्षा के दौरान यह भी सामने आया कि लोक निर्माण विभाग (भवन) के तहत 15 कार्य प्रगतिरत हैं जबकि 2 कार्य अब तक शुरू नहीं हो सके हैं। इस पर कलेक्टर ने लंबित कार्य जल्द प्रारंभ करने के निर्देश दिए।
बैठक में विधि महाविद्यालय भवन, सांदीपनि विद्यालयों और अन्य निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा भी की गई। अधिकारियों ने बताया कि कई परियोजनाओं को मई और जून 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि पीआईयू द्वारा हैंडओवर से पहले सभी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और फिनिशिंग सुनिश्चित की जाए।
एमपीआरडीसी की समीक्षा के दौरान रतलाम-झाबुआ मार्ग निर्माण कार्य की धीमी गति पर नाराजगी जताई गई। कलेक्टर ने पाइपलाइन क्षति होने पर तत्काल रिस्टोरेशन और निर्माण गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए। वहीं एनएचएआई अधिकारियों ने कालीदेवी क्षेत्र में अतिक्रमण के कारण सर्विस रोड निर्माण प्रभावित होने की जानकारी दी, जिस पर प्रशासन ने जल्द अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए।
राष्ट्रीय राजमार्ग पर अवैध मीडियन कट के कारण बढ़ती दुर्घटनाओं को लेकर भी बैठक में चिंता जताई गई। कलेक्टर ने सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता बताते हुए सीसीटीवी निगरानी बढ़ाने और नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। हालांकि जिले में विकास कार्यों की लंबी सूची और समय-सीमा तय की जा रही है, लेकिन कई परियोजनाएं वर्षों से अधूरी या धीमी गति से चलने की शिकायतों के कारण सवालों में रही हैं। ऐसे में प्रशासनिक बैठकों के बाद अब लोगों की नजर जमीनी अमल पर टिकी हुई है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- जिले में कई निर्माण परियोजनाएं वर्षों से लंबित हैं, तो अब तक देरी के लिए कितने ठेकेदारों या अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है?
- हर समीक्षा बैठक में गुणवत्ता और फिनिशिंग की बात होती है, फिर भी नई सड़कें और भवन कुछ ही महीनों में खराब क्यों होने लगते हैं?
- अवैध मीडियन कट और अतिक्रमण से दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं, तो क्या प्रशासन यह स्वीकार करता है कि निगरानी और सड़क सुरक्षा व्यवस्था अब तक कमजोर रही है?