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| भारत की नई खेल नीति: पाकिस्तानी खिलाड़ियों के लिए खुलेंगे सरहद के द्वार; मल्टीलेटरल इवेंट्स में मिलेगी एंट्री Aajtak24 News |
नई दिल्ली - भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में अपनी धाक जमाने और एक 'ग्लोबल होस्ट' (वैश्विक मेजबान) के रूप में उभरने के लिए अपनी खेल नीति में एक ऐतिहासिक बदलाव किया है। पहलगाम हमले और 'ऑपरेशन सिंदूर' के एक साल बाद, नई दिल्ली ने कूटनीति और खेल भावना के बीच एक महीन संतुलन साधने की कोशिश की है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अंतरराष्ट्रीय महासंघों के नियमों का सम्मान करेगी, जिससे पाकिस्तान के खिलाड़ियों के लिए भारत में होने वाले बहुपक्षीय (Multilateral) आयोजनों के द्वार खुल गए हैं।
दो-टूक संदेश: द्विपक्षीय सीरीज पर 'नो एंट्री' बरक़रार
सरकार की नई नीति का सबसे कड़ा रुख द्विपक्षीय (Bilateral) संबंधों को लेकर है। सरकार ने साफ कर दिया है कि जब तक सीमा पार से तनाव और सुरक्षा चिंताएं बनी हुई हैं, भारत और पाकिस्तान के बीच कोई भी 'आमने-सामने' की सीरीज नहीं खेली जाएगी।
न हम जाएंगे, न वो आएंगे: भारतीय टीमें न तो पाकिस्तान का दौरा करेंगी और न ही पाकिस्तानी टीमों को विशेष रूप से द्विपक्षीय मुकाबलों के लिए भारत आमंत्रित किया जाएगा।
सभी खेलों पर शिकंजा: यह प्रतिबंध केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं है, बल्कि हॉकी, फुटबॉल और कबड्डी जैसे सभी खेलों पर सख्ती से लागू रहेगा।
इंटरनेशनल इवेंट्स के लिए खुला 'स्पेशल गेट'
भारत अब अंतरराष्ट्रीय महासंघों (जैसे ICC, IOC, और FIH) के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करना चाहता है। नई नीति के तहत, यदि भारत किसी विश्व स्तरीय टूर्नामेंट (जैसे वर्ल्ड कप या चैंपियंस ट्रॉफी) की मेजबानी करता है, तो पाकिस्तानी टीम को खेलने की अनुमति दी जाएगी। यह फैसला भारत की उस छवि को सुधारेगा जिसमें अक्सर वीजा देरी के कारण अंतरराष्ट्रीय संघ भारत को मेजबानी देने से कतराते थे।
वीजा प्रक्रिया में 'डिजिटल और फास्ट' बदलाव
खिलाड़ियों और अधिकारियों के लिए अब वीजा मिलना पहले जैसा सिरदर्द नहीं होगा:
मल्टी-एंट्री वीजा: अंतरराष्ट्रीय फेडरेशन के पदाधिकारियों के लिए अब 5 साल तक का मल्टी-एंट्री वीजा उपलब्ध होगा।
सरल मानक: खिलाड़ियों और तकनीकी स्टाफ के लिए आवेदन प्रक्रिया को तेज और सरल बनाया गया है ताकि अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा किया जा सके।
लक्ष्य: 2036 ओलंपिक और 2029 चैंपियंस ट्रॉफी
इस नीति का सीधा असर भविष्य के बड़े आयोजनों पर पड़ेगा। भारत ने 2036 ओलंपिक और 2038 एशियन गेम्स की मेजबानी के लिए अपनी दावेदारी पेश की है। नई नीति के बाद 2029 की चैंपियंस ट्रॉफी, 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स और 2031 के क्रिकेट वर्ल्ड कप में पाकिस्तानी टीम के भारत आने का रास्ता साफ हो गया है। हालाँकि, आईपीएल (IPL) को एक 'निजी लीग' माना गया है, इसलिए इसमें पाकिस्तानी खिलाड़ियों की एंट्री पर फिलहाल संशय बना हुआ है।
'ग्लोबल होस्ट' बनने की महात्वाकांक्षा
सरकार का यह निर्णय स्पष्ट संदेश देता है कि भारत अपनी सुरक्षा चिंताओं से समझौता किए बिना दुनिया के लिए अपने खेल के दरवाजे खोलना चाहता है। यह 'जियो-पॉलिटिक्स' और स्पोर्ट्स प्रोटोकॉल के बीच एक ऐसी रेखा है जो भारत को एक विश्वसनीय और पेशेवर मेजबान के रूप में दुनिया के सामने पेश करेगी।
