कांकेर; पेड़ के नीचे बैठकर अफसर ने बदली तस्वीर: कंदाड़ी में चौपाल, कोटरी नदी पार कर पहुंचा प्रशासन Aajtak24 News

कांकेर; पेड़ के नीचे बैठकर अफसर ने बदली तस्वीर: कंदाड़ी में चौपाल, कोटरी नदी पार कर पहुंचा प्रशासन Aajtak24 News 

कांकेर - जिले में “सुशासन तिहार” और “बस्तर मुन्ने अभियान” के तहत एक अलग ही नज़ारा देखने को मिला, जब जिला पंचायत सीईओ श्री हरेश मंडावी खुद कोटरी नदी पार कर सुदूरवर्ती ग्राम पंचायत कंदाड़ी पहुंचे। यहां उन्होंने आम पेड़ के नीचे जमीन पर बैठकर ग्रामीणों के बीच चौपाल लगाई और उनकी समस्याएं सीधे सुनीं। कभी अतिसंवेदनशील क्षेत्र के रूप में पहचाने जाने वाले इस गांव में पहली बार किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को अपने बीच बैठा देखकर ग्रामीणों में उत्साह और भरोसा दोनों दिखाई दिया। सीईओ ने बताया कि बस्तर मुन्ने अभियान, सुशासन तिहार और नियद नेल्लानार योजना 2.0 के तहत कोयलीबेड़ा ब्लॉक के सभी पात्र हितग्राहियों को शासन की 31 योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ दिलाना लक्ष्य है। उन्होंने साफ कहा कि जब तक हर पात्र व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच जाता, तब तक ऐसे शिविर लगातार जारी रहेंगे।

ग्रामीणों की मुख्य समस्याएं

ग्रामीणों ने आधार, जन्म प्रमाण पत्र और राशन कार्ड में नाम त्रुटियों के कारण योजनाओं से वंचित रहने की समस्या रखी। साथ ही पेयजल संकट को सबसे बड़ी परेशानी बताया। इस पर सीईओ ने मौके पर ही बोर खनन की सहमति दी। इसके अलावा सीसी रोड निर्माण, स्कूल बाउंड्रीवाल, और आलदंड गांव की जर्जर प्राथमिक शाला के स्थान पर किचन शेड व अतिरिक्त कक्ष स्वीकृत करने का आश्वासन भी दिया।

निर्माण कार्यों का निरीक्षण

सीईओ ने ग्राम आलदंड में 11.69 लाख रुपये की लागत से बन रहे आंगनबाड़ी केंद्र का भी निरीक्षण किया और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।

छात्रा से संवाद

निरीक्षण के दौरान वे ग्रामीण आयतु नरेटी के घर पहुंचे, जहां उन्होंने उनकी पुत्री अमिला नरेटी से मुलाकात की। बीएससी में 71% अंक से उत्तीर्ण अमिला आगे एमएससी करना चाहती हैं। इस पर सीईओ ने जिला प्रशासन की ओर से हरसंभव सहायता देने का आश्वासन दिया।

ओरछागांव में नाराजगी भी जताई

इसके बाद सीईओ ने महाराष्ट्र सीमा से लगे ओरछागांव (गोपालपुर) में आयोजित शिविर का भी निरीक्षण किया। यहां पंचायत सचिव द्वारा योजनाओं की पूरी जानकारी न दे पाने पर उन्होंने नाराजगी जताई और दोबारा विस्तृत शिविर लगाने के निर्देश दिए। ग्रामीणों ने यहां लो-वोल्टेज, पेयजल और सीसी रोड निर्माण की मांग रखी, जिस पर उन्होंने त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिलाया।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सीधे सवाल

  1. जब योजनाएं कागज पर 31 बताई जा रही हैं, तो क्या यह प्रशासनिक विफलता नहीं कि सचिव स्तर पर भी ग्रामीणों को उनकी पूरी जानकारी नहीं दी जा पा रही? जिम्मेदारी तय होगी या सिर्फ निर्देश देकर मामला खत्म कर दिया जाएगा?
  2. पेयजल और बिजली जैसी बुनियादी समस्याएं वर्षों से बनी हुई हैं—क्या यह स्वीकार किया जाएगा कि “सुशासन तिहार” के बावजूद जमीनी ढांचा अभी भी प्राथमिक स्तर पर अटका हुआ है?
  3. सीईओ के मौके पर बोर खनन और निर्माण स्वीकृति देने से क्या यह संदेश नहीं जाता कि नियमित सिस्टम काम नहीं कर रहा और फैसले केवल दौरे पर ही लिए जा रहे हैं?

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