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| आलीराजपुर; रात में गांव पहुंचीं कलेक्टर… चौपाल में खुलीं अस्पताल, पानी और आवास योजनाओं की हकीकत Aajtak24 News |
आलीराजपुर - जिले के सोंडवा विकासखंड के वालपुर गांव में गुरुवार रात आयोजित रात्रि चौपाल और खाटला बैठक में कलेक्टर नीतू माथुर ने ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देशानुसार आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य गांवों में पहुंचकर मौके पर समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करना बताया गया। रात्रि चौपाल के दौरान ग्रामीणों ने आवास योजना, पेयजल संकट, समग्र आईडी, अस्पतालों में डॉक्टरों की अनुपस्थिति और राजस्व संबंधी समस्याओं को लेकर आवेदन प्रस्तुत किए। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को समय-सीमा में निराकरण के निर्देश देते हुए कहा कि हर माह इस तरह की बैठक आयोजित की जाएगी, ताकि ग्रामीणों को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए जिला मुख्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें।
ग्रामीणों ने सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों के नियमित रूप से नहीं बैठने की शिकायत की, जिस पर कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। वहीं पीएचई विभाग को क्षेत्र में भ्रमण कर पेयजल समस्याओं के प्राथमिकता से समाधान के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने ग्रामीणों से स्कूल, आंगनवाड़ी, अस्पताल, सीमांकन, नामांतरण, बंटवारा और उचित मूल्य दुकानों की स्थिति के बारे में भी जानकारी ली। विभागीय अधिकारियों ने ग्रामीणों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी और प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों की सूची का वाचन भी किया गया।
रात्रि चौपाल में स्वास्थ्य विभाग द्वारा लू और तापघात से बचाव के उपायों की जानकारी भी दी गई। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष हजरी बाई खरत, जिला पंचायत सीईओ संघमित्रा गौतम सहित कई अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। हालांकि प्रशासनिक चौपालों और संवाद कार्यक्रमों के बावजूद आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य, पेयजल और आवास जैसी बुनियादी समस्याएं लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे में अब लोगों की नजर इस बात पर है कि चौपाल में दिए गए निर्देश जमीन पर कितनी जल्दी दिखाई देते हैं।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- अगर अस्पतालों में डॉक्टर नियमित नहीं बैठ रहे थे, तो अब तक संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही क्यों तय नहीं की गई?
- हर माह रात्रि चौपाल आयोजित करने की बात कही जा रही है, तो क्या पिछले चौपालों में मिले आवेदनों के निराकरण की सार्वजनिक समीक्षा भी की जाएगी?
- आवास और पेयजल जैसी मूलभूत समस्याएं वर्षों से बनी हुई हैं, तो क्या प्रशासन यह मानता है कि योजनाओं के क्रियान्वयन में जमीनी स्तर पर गंभीर खामियां हैं?
