| बिलासपुर; सुशासन तिहार पर सख्ती: लापरवाही पर नोटिस, क्या अब ‘काम नहीं तो कार्रवाई’ सच में लागू होगा? Aajtak24 News |
बिलासपुर - सुशासन तिहार के तहत प्राप्त हो रहे आवेदनों के निराकरण में लापरवाही अब भारी पड़ सकती है। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने साप्ताहिक टीएल बैठक में साफ निर्देश दिए कि आम जनता की समस्याओं का समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित किया जाए, वरना जिम्मेदारी तय होगी। बैठक में तखतपुर क्षेत्र में शिविरों के प्रचार-प्रसार में कमी पाए जाने पर कलेक्टर ने कड़ी नाराजगी जताई। आम लोगों तक जानकारी न पहुंचने के कारण अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाने पर तखतपुर के सीएमओ अमरेश सिंह को शोकॉज नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। साथ ही सभी विभागों को जनकल्याणकारी योजनाओं का व्यापक प्रचार सुनिश्चित करने को कहा गया।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की समीक्षा के दौरान जिले में मौजूद 86 सूखे नलकूपों को रिचार्जिंग के लिए उपयोग में लाने के निर्देश दिए गए, ताकि जल संरक्षण को बढ़ावा मिल सके। ई-डिस्ट्रिक्ट योजना के तहत करीब 12 प्रतिशत आवेदनों के निरस्त होने पर भी कलेक्टर ने असंतोष जताया और लोकसेवा केंद्रों के ऑपरेटरों को प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए, जिससे आवेदन की गुणवत्ता सुधर सके।
महतारी वंदन योजना के अंतर्गत अब तक 71 प्रतिशत ई-केवाईसी पूर्ण होने की जानकारी दी गई, जबकि शेष कार्य को प्राथमिकता से जल्द पूरा करने को कहा गया। वहीं आयुष्मान कार्ड योजना में अब भी 3 लाख से अधिक पात्र हितग्राहियों के कार्ड बनना बाकी है, जिस पर विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए।
राजस्व मामलों में एक वर्ष से अधिक समय से लंबित प्रकरणों को 3-4 दिनों में निपटाने के सख्त निर्देश दिए गए। बैठक में निगम आयुक्त प्रकाश सर्वे और जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन की इस सख्ती से यह साफ है कि अब केवल योजनाएं बनाना ही नहीं, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन भी प्राथमिकता में है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- बार-बार निर्देश और समीक्षा के बावजूद योजनाओं में लापरवाही क्यों सामने आ रही है—क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई हुई है?
- ई-डिस्ट्रिक्ट में 12% आवेदन निरस्त होना क्या सिस्टम की खामी नहीं दर्शाता, और इससे आम लोगों को होने वाली परेशानी की जिम्मेदारी कौन लेगा?
- आयुष्मान कार्ड और ई-केवाईसी जैसे अहम कार्यों में बड़ी संख्या अब भी लंबित है—क्या प्रशासन तय समयसीमा में इसे पूरा करने की गारंटी दे सकता है?