रायगढ़; हर जिले में बनेगा ‘हरी खाद मॉडल ग्राम’—खेती की पूरी तस्वीर बदलने प्रशासन का बड़ा प्लान Aajtak24 News

रायगढ़; हर जिले में बनेगा ‘हरी खाद मॉडल ग्राम’—खेती की पूरी तस्वीर बदलने प्रशासन का बड़ा प्लान Aajtak24 News

रायगढ़ - छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिला में कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती शहला निगार की अध्यक्षता में आयोजित संभाग स्तरीय मैराथन बैठक में खरीफ 2026 की व्यापक कार्ययोजना तय की गई। सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक चली इस बैठक में कृषि, उद्यानिकी और मार्कफेड विभाग की योजनाओं की समीक्षा के साथ कृषि क्षेत्र में बड़े बदलावों की दिशा तय की गई। बैठक में निर्देश दिया गया कि प्रत्येक जिले में कम से कम एक गांव को हरी खाद के उपयोग हेतु “मॉडल ग्राम” के रूप में विकसित किया जाए, ताकि किसानों को प्राकृतिक और टिकाऊ खेती के प्रत्यक्ष लाभ मिल सकें।

कृषि उत्पादन आयुक्त ने स्पष्ट किया कि खेती को लाभकारी बनाने के लिए फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना जरूरी है। इसके तहत धान के स्थान पर दलहन, तिलहन, मक्का और मोटे अनाज जैसी फसलों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। साथ ही प्रत्येक जिले में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार एक प्रमुख फसल विकसित कर उत्पादन और विपणन को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

बैठक में जैविक खेती, हरी खाद, नील-हरित काई और नैनो यूरिया जैसे वैकल्पिक उपायों को बढ़ावा देने पर विशेष चर्चा हुई। अधिकारियों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर संतुलित उर्वरक उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। उर्वरक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए ई-उर्वरक मॉड्यूल, पीओएस मशीन और उन्नत भंडारण व्यवस्था को सख्ती से लागू करने पर बल दिया गया। कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए उड़नदस्ता दल गठित करने के भी निर्देश दिए गए।

बैठक में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फार्मर आईडी निर्माण, उद्यानिकी फसलों, ऑयल पाम और निर्यात योग्य फसलों के विस्तार की समीक्षा की गई। इसके अलावा “विकसित कृषि संकल्प अभियान” के तहत 5 से 20 मई 2026 तक गांव-गांव शिविर लगाने का निर्णय लिया गया, जिसमें किसानों को आधुनिक खेती, ड्रोन तकनीक, किसान क्रेडिट कार्ड और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। बैठक में बिलासपुर संभाग के आयुक्त सुनील कुमार जैन, मार्कफेड प्रबंध संचालक जितेंद्र कुमार शुक्ला सहित सभी जिलों के कलेक्टर और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. हर जिले में मॉडल ग्राम बनाने की घोषणा हुई है, लेकिन क्या इसके लिए अलग बजट और तकनीकी स्टाफ भी सुनिश्चित किया गया है या यह केवल निर्देश स्तर पर रहेगा?
  2. ई-उर्वरक और पीओएस सिस्टम लागू होने के बावजूद क्या ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी खाद की कालाबाजारी और कमी की शिकायतें पूरी तरह खत्म हो पाई हैं?
  3. फसल विविधीकरण की बात तो हो रही है, लेकिन क्या किसानों को धान छोड़कर दलहन-तिलहन अपनाने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य और बाजार की गारंटी भी दी जाएगी?

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