![]() |
| छतरपुर; अब सरकार के रिकॉर्ड में दर्ज होगा हर दरवाजा! छतरपुर में शुरू हुई हाईटेक जनगणना Aajtak24 News |
छतरपुर - जिले में जनगणना 2027 के पहले चरण की शुरुआत हो चुकी है। जिलेभर में मकानों के सूचीकरण और मकान गणना का कार्य अब पूरी तरह डिजिटल तरीके से किया जा रहा है। प्रशासन ने इस अभियान को तकनीकी और समयबद्ध बनाने के लिए प्रगणकों को मैदान में उतार दिया है। एक मई से शुरू हुआ यह अभियान 30 मई 2026 तक चलेगा, जिसमें घर-घर जाकर मकानों और परिवारों से जुड़ी जानकारियां जुटाई जाएंगी। कलेक्टर पार्थ जैसवाल के निर्देशन में जिला पंचायत सीईओ नमः शिवाय अरजरिया ने ऑडिटोरियम हॉल में जनगणना सुपरवाइजरों और प्रगणकों को आवश्यक प्रशिक्षण और दिशा-निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने जनगणना टीमों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान डिप्टी कलेक्टर आयशा अंसारी, तहसीलदार पीयूष दीक्षित सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।
प्रशासन के अनुसार इस बार जनगणना कार्य पूरी तरह डिजिटल माध्यम से किया जा रहा है। प्रगणक मोबाइल ऐप के जरिए घर-घर जाकर जानकारी दर्ज कर रहे हैं। इसके लिए एचएलओ ऐप इंस्टॉलेशन और लॉगिन प्रक्रिया भी सुनिश्चित कराई गई है। जनगणना टीमों को निर्देश दिए गए हैं कि हर मकान और परिवार की सही एवं सटीक जानकारी दर्ज की जाए। जिले के नगर परिषद खजुराहो, बड़ामलहरा, गढ़ी मलहरा, हरपालपुर, सटई, गौरीहार और बिजावर सहित कई क्षेत्रों में सुपरवाइजरों एवं प्रगणकों को किट वितरित की गई। वहीं खजुराहो के वार्ड 7 और 13 में टीमों ने सक्रिय रूप से मकान सूचीकरण कार्य शुरू कर दिया है।
बक्सवाहा विकासखंड के ग्राम तेजूपुरा, पौंडी, गुगवारा, सुनवाहा, बमहौरी और निवार सहित कई ग्रामीण क्षेत्रों में भी अधिकारियों द्वारा जनगणना कार्य का निरीक्षण किया गया। नवगांव, पांडेपुरवा और राजनगर क्षेत्रों में भी एचएलबी स्तर पर निरीक्षण कर कार्य की प्रगति का जायजा लिया गया। प्रशासन का कहना है कि जनगणना के जरिए जिले की वास्तविक सामाजिक और आर्थिक तस्वीर सामने आएगी। इसी आधार पर भविष्य की योजनाएं और विकास कार्य तय किए जाएंगे। नागरिकों से अपील की गई है कि वे सही जानकारी देकर जनगणना कार्य में सहयोग करें।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- डिजिटल जनगणना को पारदर्शी बताया जा रहा है, लेकिन क्या प्रशासन यह सुनिश्चित कर पाया है कि तकनीकी खराबी, नेटवर्क समस्या या ऐप फेल होने से किसी गरीब या दूरदराज परिवार का डेटा छूट न जाए?
- जनगणना के दौरान नागरिकों की निजी जानकारी मोबाइल ऐप में दर्ज की जा रही है, तो डेटा सुरक्षा और साइबर गोपनीयता को लेकर प्रशासन की क्या ठोस व्यवस्था है?
- क्या प्रशासन के पास ऐसे परिवारों और अस्थायी बस्तियों की अलग सूची है जो अक्सर सरकारी रिकॉर्ड से बाहर रह जाते हैं, या इस बार भी हजारों लोग योजनाओं से वंचित रह जाएंगे?
