शहडोल, सिर्फ भाषण नहीं, अब ‘निर्णय लेने वाली’ बनें महिलाएं—शहडोल के कॉलेज में उठा आत्मनिर्भरता का बड़ा मुद्दा Aajtak24 News

शहडोल, सिर्फ भाषण नहीं, अब ‘निर्णय लेने वाली’ बनें महिलाएं—शहडोल के कॉलेज में उठा आत्मनिर्भरता का बड़ा मुद्दा Aajtak24 News

शहडोल - शहडोल के पॉलिटेक्निक कॉलेज में आयोजित महिला सशक्तिकरण जागरूकता कार्यक्रम में महिलाओं की शिक्षा, आत्मनिर्भरता, सुरक्षा और निर्णय लेने की क्षमता को लेकर गंभीर चर्चा हुई। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना नहीं, बल्कि युवतियों और छात्राओं को अपने अधिकारों के प्रति सजग और आत्मविश्वासी बनाना था।

“महिला सशक्तिकरण का मतलब सिर्फ रोजगार नहीं”

कार्यक्रम में बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष श्रीमती कल्याणी वाजपेई ने कहा कि महिला सशक्तिकरण का वास्तविक अर्थ महिलाओं को—

  • अपने जीवन के निर्णय स्वयं लेने योग्य बनाना
  • शिक्षा और स्वास्थ्य के अधिकारों तक समान पहुंच देना
  • आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक सम्मान दिलाना
  • आत्मविश्वास के साथ जीवन जीने के लिए तैयार करना

है।

उन्होंने कहा कि समाज में महिलाओं की बराबरी केवल कानून से नहीं, बल्कि सोच और व्यवहार में बदलाव से संभव होगी।

महिला और बाल सुरक्षा हेल्पलाइन की जानकारी

कार्यक्रम में सहायक संचालक श्रीमती संगीता भगत ने छात्राओं को—

  • महिला हेल्पलाइन 181
  • चाइल्ड हेल्पलाइन 1098
  • वन स्टॉप सेंटर की सुविधाएं

के बारे में जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि किसी भी प्रकार की हिंसा, उत्पीड़न या संकट की स्थिति में महिलाएं और बच्चे इन सेवाओं का उपयोग कर सकते हैं।

कॉलेज परिसर में जागरूकता का माहौल

कार्यक्रम में पॉलिटेक्निक कॉलेज के प्रोफेसर, छात्राएं और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। संवाद आधारित इस कार्यक्रम में छात्राओं को सामाजिक चुनौतियों, कानूनी अधिकारों और आत्मनिर्भरता के विषय में जानकारी दी गई।

महिला सशक्तिकरण की जमीन पर असली चुनौती

हालांकि ऐसे कार्यक्रम जागरूकता बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माने जा रहे हैं, लेकिन सवाल यह भी है कि क्या केवल सेमिनार और भाषणों से सामाजिक स्तर पर महिलाओं की स्थिति में वास्तविक बदलाव आ पाएगा?

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

1. महिला सशक्तिकरण कार्यक्रमों के बाद यह मापने का कोई ठोस तंत्र है कि छात्राओं और महिलाओं में वास्तविक स्तर पर कितना बदलाव आया?

2. ग्रामीण और छोटे शहरों में महिला हेल्पलाइन और वन स्टॉप सेंटर की पहुंच और प्रभावशीलता कितनी मजबूत है, खासकर उन महिलाओं के लिए जो डिजिटल या सामाजिक रूप से जागरूक नहीं हैं?

3. क्या महिला सशक्तिकरण को केवल जागरूकता कार्यक्रमों तक सीमित रखने के बजाय शिक्षा, रोजगार और सुरक्षा से जुड़ी स्थायी नीतिगत पहलें पर्याप्त गति से लागू हो रही हैं?

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