मुंगेली; सुशासन तिहार’ में जनता की कतार, नेताओं के भरोसे और अफसरों की चेतावनी के बीच असली कसौटी अभी बाकी Aajtak24 News

मुंगेली; सुशासन तिहार’ में जनता की कतार, नेताओं के भरोसे और अफसरों की चेतावनी के बीच असली कसौटी अभी बाकी Aajtak24 News

मुंगेली - सुशासन तिहार 2026 के तहत मुंगेली जिले में आयोजित समाधान शिविर एक बार फिर सरकारी योजनाओं और जनता की उम्मीदों का केंद्र बना। आदर्श कृषि उपज मंडी परिसर में आयोजित इस शिविर में विधायक पुन्नूलाल मोहले, कलेक्टर कुन्दन कुमार, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल और वनमंडलाधिकारी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

शिविर में विभिन्न विभागों ने स्टॉल लगाकर योजनाओं की जानकारी दी और स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों की जांच कर दवाइयां व परामर्श उपलब्ध कराया। बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने अपनी समस्याओं और मांगों से संबंधित आवेदन भी प्रस्तुत किए।

विधायक पुन्नूलाल मोहले ने कहा कि सुशासन तिहार सरकार और जनता के बीच विश्वास का मजबूत सेतु बन रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक पात्र हितग्राही तक योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचे। ई-केवाईसी, राशन वितरण और जियो-टैगिंग जैसे कार्यों को समयसीमा में पूरा करने पर भी उन्होंने जोर दिया।

उन्होंने यह भी कहा कि गंभीर मरीजों को एम्बुलेंस सेवा से तुरंत उपचार मिले और बिजली व पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की समस्याओं का त्वरित समाधान हो।

कलेक्टर कुन्दन कुमार ने अपने संबोधन में जल संरक्षण को सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि जल जीवन का आधार है और इसके संरक्षण में जनभागीदारी जरूरी है। उन्होंने रेन वाटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा देने की अपील की। साथ ही मानसून से पहले विद्युत व्यवस्था सुधारने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

कलेक्टर ने प्रशासनिक कार्यशैली पर टिप्पणी करते हुए कहा कि “एआई के दौर में भी संवेदनशीलता ही प्रशासन की सबसे बड़ी ताकत है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अवैध प्लाटिंग पर सख्त कार्रवाई होगी और किसी भी नागरिक को अनावश्यक रूप से दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने दिए जाएंगे।

हालांकि, शिविर में दिए गए आश्वासनों और निर्देशों के बीच यह सवाल भी उठता है कि क्या ये योजनाएं और घोषणाएं वास्तव में गांव और जरूरतमंद लोगों तक समय पर पहुंच पाएंगी या फिर यह प्रक्रिया सिर्फ शिविरों और बैठकों तक सीमित रह जाएगी।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. हर शिविर में “योजनाओं के शत-प्रतिशत लाभ” का दावा किया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर अब भी लोग ई-केवाईसी, राशन और पेयजल जैसी समस्याओं से क्यों जूझ रहे हैं?
  2. कलेक्टर ने संवेदनशीलता को प्रशासन की ताकत बताया, लेकिन क्या प्रशासनिक लापरवाही के मामलों में अब तक किसी अधिकारी पर ठोस कार्रवाई भी हुई है?
  3. सुशासन तिहार जैसे अभियानों में हजारों आवेदन लिए जा रहे हैं, लेकिन क्या सरकार यह बताने को तैयार है कि पिछले शिविरों में दिए गए कितने आश्वासन वास्तव में स्थायी रूप से पूरे हुए हैं?

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