दंतेवाड़ा; जंगल में मौत का जाल! दंतेवाड़ा में नक्सलियों का विस्फोटक डंप बरामद, सुरक्षाबलों ने बड़ी साजिश नाकाम की Aajtak24 News

जंगल में मौत का जाल! दंतेवाड़ा में नक्सलियों का विस्फोटक डंप बरामद, सुरक्षाबलों ने बड़ी साजिश नाकाम की Aajtak24 News

दंतेवाड़ा - बस्तर संभाग में नक्सल गतिविधियों के खिलाफ चल रहे सघन अभियान के तहत दंतेवाड़ा जिले के बारसूर थाना क्षेत्र में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। घने जंगलों में चलाए गए संयुक्त सर्च ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों द्वारा छिपाकर रखा गया विस्फोटक और हथियारों का बड़ा डंप बरामद किया गया है। यह कार्रवाई 2 मई 2026 को मिली सटीक खुफिया सूचना के आधार पर की गई। सूचना मिलने के बाद CRPF की 195वीं वाहिनी और दंतेवाड़ा पुलिस की संयुक्त टीम ने ग्राम तोड़मा के जंगल क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। कई घंटों की तलाशी के बाद सुरक्षाबलों को जंगल में छिपाया गया भारी विस्फोटक भंडार और प्रतिबंधित सामग्री मिली।

बरामद सामग्री में इलेक्ट्रिक डेटोनेटर, विभिन्न प्रकार के कारतूस (SLR, INSAS, 7.62×39 मिमी, .303 ब्लैंक राउंड), 12 बोर राउंड और खाली केस, BGL कारतूस के खाली केस, करीब 500 ग्राम विस्फोटक, जिलेटिन, सेफ्टी फ्यूज वायर, यूरिया पाउडर, वायरलेस सेट और DMR संचार उपकरण शामिल हैं। इसके अलावा एक भरमार राइफल, बैटरियां, कैमरा फ्लैश, इलेक्ट्रिक वायर, ग्रेनेड पिन और नक्सली साहित्य भी बरामद किया गया।सुरक्षाबलों के अनुसार यह सामग्री किसी बड़ी नक्सली रणनीति या हमले की तैयारी का हिस्सा हो सकती थी, जिसे समय रहते बरामद कर लिया गया। जंगल क्षेत्र में इस तरह का डंप मिलने से यह साफ होता है कि प्रतिबंधित संगठन अभी भी छिपकर अपनी गतिविधियों को संचालित करने की कोशिश कर रहे हैं।

ऑपरेशन के बाद सभी जवान सुरक्षित रूप से बेस कैंप लौट आए। बरामद सामग्री को जब्त कर आगे की विधिक कार्रवाई और जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि बस्तर क्षेत्र में नक्सलियों के आत्मसमर्पण और लगातार दबाव के बाद अब उनके नेटवर्क को कमजोर करने के लिए ऐसे सर्च ऑपरेशन और तेज किए जा रहे हैं। हालांकि घने जंगलों में छिपे डंप अब भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बने हुए हैं।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सीधे सवाल

  1. इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक और हथियार जंगल में कैसे पहुंचाए गए और खुफिया एजेंसियों को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं मिली?
  2. यदि नक्सली डंप लगातार मिल रहे हैं, तो क्या इसका मतलब है कि इलाके में उनकी सक्रिय नेटवर्क सप्लाई लाइन अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है?
  3. क्या ऐसे सर्च ऑपरेशन के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीणों की सुरक्षा और विकास के लिए कोई समानांतर रणनीति भी लागू की जा रही है, ताकि नक्सल प्रभाव को स्थायी रूप से खत्म किया जा सके?


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