उज्जैन; उपार्जन केंद्रों पर कलेक्टर का सख्त निरीक्षण Aajtak24 News

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उज्जैन - कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने सोमवार दोपहर जिले के विभिन्न गेहूं उपार्जन केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने किसानों की सुविधा, भुगतान व्यवस्था और खरीदी केंद्रों की व्यवस्थाओं का मौके पर जाकर जायजा लिया। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार किसानों को उपार्जित गेहूं पर बोनस सहित कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की राशि का भुगतान किया जा रहा है। साथ ही किसानों की सुविधा को देखते हुए उपार्जन की अवधि 23 मई तक बढ़ा दी गई है।

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने ग्राम रामवासा स्थित करोहन समिति, ग्राम बमौरा स्थित मंगरोला उपार्जन केंद्र और ग्राम गोंदिया स्थित सेवा सहकारी समिति गोंदिया का दौरा किया। उन्होंने केंद्रों पर पेयजल, छांव, बैठने की व्यवस्था तथा गर्मी को देखते हुए ओआरएस और ग्लूकोज जैसी आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता की जांच की। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने समिति प्रबंधकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि स्लॉट बुकिंग कर आने वाले किसानों का उपार्जन समयसीमा में पूरा किया जाए और किसी भी किसान को अनावश्यक इंतजार न करना पड़े।

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने किसानों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं और व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली। इसी दौरान बमौरा स्थित मंगरोला समिति में लापरवाही पाए जाने पर समिति प्रबंधक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। जिले में कुल 198 उपार्जन केंद्रों के माध्यम से खरीदी प्रक्रिया संचालित की जा रही है। प्रशासन ने बताया कि अब तक 63,451 किसानों से 3,40,338 मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की जा चुकी है और किसानों को 349 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है।

जिले में उपार्जन व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए तहसील और ब्लॉक स्तर पर नोडल अधिकारियों की तैनाती की गई है, जो लगातार केंद्रों का निरीक्षण कर रहे हैं। इसके साथ ही 22,630 गठान बारदाने की पर्याप्त उपलब्धता और 88 प्रतिशत गेहूं का परिवहन पूरा होने की जानकारी भी दी गई है। प्रशासन का दावा है कि पूरी खरीदी प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से संचालित की जा रही है, ताकि किसानों को समर्थन मूल्य का पूरा लाभ मिल सके।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. 198 उपार्जन केंद्रों के बावजूद किसानों को अब भी कतार और देरी की शिकायतें क्यों हैं—क्या सिस्टम क्षमता और वास्तविक व्यवस्था में अंतर है?
  2. 349 करोड़ भुगतान का दावा किया जा रहा है, लेकिन क्या यह भुगतान सभी किसानों को समय पर मिला या अभी भी कई किसान लंबित भुगतान से जूझ रहे हैं?
  3. लापरवाही पर नोटिस तो जारी हुआ, लेकिन क्या प्रशासन यह बताएगा कि ऐसे मामलों में अब तक कितने अधिकारियों या समितियों पर वास्तविक दंडात्मक कार्रवाई हुई है?

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