
मोहला; सरपंचों की बैठक में खुली गांवों की असली चुनौती… पानी, आवास और बेरोजगारी पर प्रशासन की बड़ी चिंता Aajtak24 News
मोहला - जिले के मानपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम साल्हेभट्टी में आयोजित बैठक में कलेक्टर तुलिका प्रजापति ने 15 ग्राम पंचायतों के सरपंचों के साथ विकास कार्यों, पेयजल संकट और ग्रामीण समस्याओं पर विस्तृत चर्चा की। बैठक सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर से पहले हुई। बैठक में जिला पंचायत सीईओ भारती चंद्राकर, एसडीएम अमित नाथ योगी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, पटवारी और पंचायत प्रतिनिधि मौजूद रहे।
कलेक्टर ने कहा कि जिन विषयों पर सबसे अधिक शिकायतें मिल रही हैं, उनका प्राथमिकता से समाधान किया जाए। पेयजल संकट और घटते जलस्तर को गंभीर मुद्दा बताते हुए उन्होंने ग्राम पंचायतों को तालाब निर्माण, कुएं निर्माण और जल संरक्षण कार्यों के प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।
उन्होंने पंचायत स्तर पर हर महीने ग्राम सचिवालय आयोजित करने पर भी जोर दिया, ताकि गांवों की समस्याओं और विकास कार्यों की समीक्षा स्थानीय स्तर पर हो सके। प्रधानमंत्री आवास योजना की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने निर्माण कार्यों में तेजी लाने को कहा और चेताया कि समय पर कार्य पूरे नहीं होने से आगे आवास स्वीकृति प्रभावित हो सकती है।
बैठक में ग्रामीण युवाओं के कौशल विकास पर भी विशेष चर्चा हुई। कलेक्टर ने पंचायतों से इलेक्ट्रिशियन, प्लंबर और सोलर टेक्नीशियन जैसे ट्रेड्स में प्रशिक्षण के लिए युवाओं की सूची तैयार करने को कहा, ताकि उन्हें रोजगार से जोड़ा जा सके। इसके अलावा किसानों के एग्रीस्टैक पंजीयन, आधार अपडेट और अटल डिजिटल सुविधा केंद्रों की प्रगति की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने सरपंचों से किसानों को एग्रीस्टैक में पंजीयन के लिए जागरूक करने की अपील की।
हालांकि प्रशासन की बैठकों में जल संरक्षण, रोजगार और विकास योजनाओं पर लगातार जोर दिया जा रहा है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की कमी, अधूरे आवास और बेरोजगारी जैसी समस्याएं अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। ऐसे में सवाल यही है कि क्या पंचायत स्तर की ये योजनाएं जमीनी बदलाव ला पाएंगी या केवल बैठकों और निर्देशों तक सीमित रह जाएंगी।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- अगर गांवों में जल संकट लगातार गहराता जा रहा है, तो अब तक जल संरक्षण के स्थायी मॉडल क्यों विकसित नहीं हो पाए?
- प्रधानमंत्री आवास योजना में अधूरे मकानों की संख्या बढ़ने के पीछे प्रशासनिक लापरवाही है या फंड और मॉनिटरिंग की कमी?
- ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने की बातें वर्षों से हो रही हैं, तो अब तक कितने युवाओं को वास्तविक रोजगार मिल पाया है?