राजनांदगांव; “रिश्तों का अंत खून में! राजनांदगांव में पत्नी ने पति की हत्या के मामले में पुलिस ने किया खुलासा Aajtak24 News

राजनांदगांव; “रिश्तों का अंत खून में! राजनांदगांव में पत्नी ने पति की हत्या के मामले में पुलिस ने किया खुलासा Aajtak24 News

राजनांदगांव - जिले के सोमनी थाना क्षेत्र में घरेलू विवाद ने एक परिवार को हमेशा के लिए तोड़ दिया। काम पर जाने और पैसे देने को लेकर हुए विवाद में पति की मौत के मामले में पुलिस ने पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला अब हत्या के गंभीर अपराध के रूप में सामने आया है। जानकारी के अनुसार, मृतक तामेश्वर पारकर और उसकी पत्नी लक्ष्मी बाई पारकर के बीच 27 जुलाई 2025 को काम पर जाने और आर्थिक लेन-देन को लेकर विवाद हुआ था। विवाद उस समय और बढ़ गया जब पत्नी बिना बताए काम पर चली गई, जिससे पति नाराज हो गया।

घर लौटने पर दोनों के बीच फिर बहस शुरू हुई जो धीरे-धीरे मारपीट में बदल गई। इसी दौरान हुई झड़प में आरोप है कि पत्नी लक्ष्मी बाई ने हाथ और नाखून से हमला किया और गला दबाया, जिससे पति गंभीर रूप से घायल हो गया। इलाज के दौरान तामेश्वर पारकर की मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि मृतक के शरीर पर कई चोटों के निशान थे और मृत्यु का तरीका “हत्यात्मक” पाया गया। इसके बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

जांच के दौरान पुलिस ने सभी तथ्यों, मेडिकल रिपोर्ट और साक्ष्यों के आधार पर पत्नी लक्ष्मी बाई पारकर को हिरासत में लिया। पूछताछ में उसने घटना से जुड़ा अपराध स्वीकार किया, जिसके बाद उसे विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह मामला घरेलू विवाद से शुरू होकर हत्या तक पहुंच गया, जो सामाजिक स्तर पर भी चिंता का विषय है। पुलिस का कहना है कि ऐसे मामलों में तनाव और संवादहीनता अक्सर गंभीर अपराधों का कारण बनती है। इस कार्रवाई में सोमनी थाना प्रभारी निरीक्षक अरुण कुमार नामदेव, प्रधान आरक्षक, महिला आरक्षक सहित पूरी पुलिस टीम की भूमिका अहम रही।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सीधे सवाल

  1. घरेलू विवाद लगातार बढ़ता रहा, लेकिन क्या किसी स्तर पर काउंसलिंग या मध्यस्थता की कोई कोशिश की गई थी जिससे यह हत्या रोकी जा सकती थी?
  2. पोस्टमार्टम में ‘हत्यात्मक मृत्यु’ स्पष्ट होने के बाद ही कार्रवाई हुई, तो क्या शुरुआती जांच में पुलिस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया था?
  3. ऐसे घरेलू हिंसा और रिश्तों में बढ़ते तनाव के मामलों को रोकने के लिए पुलिस और प्रशासन के पास कोई सामाजिक या मनोवैज्ञानिक हस्तक्षेप योजना है या नहीं?

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