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| धार; अब गांव नहीं, ब्लॉक मुख्यालय बनेंगे शिक्षा के केंद्र? जनजातीय छात्रावासों के मॉडल में बड़े बदलाव का संकेत Aajtak24 News |
धार - जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा और विकास की दिशा बदलने की तैयारी के संकेत देते हुए जनजातीय कार्य विभाग की विभागीय परामर्श समिति की बैठक में कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए। मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में बिखरे हुए गांवों के बजाय ब्लॉक मुख्यालयों को शिक्षा और छात्रावास व्यवस्था का केंद्र बनाने पर जोर दिया गया। बैठक में सुझाव दिया गया कि जिन ब्लॉक मुख्यालयों में कॉलेज संचालित हैं, वहां जनजातीय क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए बस सुविधा शुरू की जाए ताकि दूरदराज के विद्यार्थियों को शिक्षा से जोड़ना आसान हो सके। मंत्री ने अपने क्षेत्र में कॉलेज जाने वाली जनजातीय छात्राओं के लिए शुरू की गई बस सुविधा को एक मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया, जिसकी बैठक में मौजूद जनप्रतिनिधियों ने सराहना की।
बैठक में केवल शिक्षा ही नहीं बल्कि जनजातीय समुदायों के सामाजिक और प्रशासनिक मुद्दों पर भी चर्चा हुई। फर्जी जाति प्रमाण पत्रों के मामलों की जांच शीघ्र पूरी करने की आवश्यकता जताई गई, ताकि वास्तविक पात्रों को योजनाओं का लाभ मिल सके। विशेष पिछड़ी जनजातियों—सहारिया, बैगा और भारिया—के लिए अलग रणनीति बनाने पर भी सहमति बनी। इनके समग्र विकास के लिए विशेष विद्यालय शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया। इसके तहत बैगा समुदाय के लिए उमरिया, सहारिया के लिए शिवपुरी और भारिया समुदाय के लिए छिंदवाड़ा में विशेष विद्यालय शुरू करने की दिशा में काम करने की बात कही गई।
बैठक में भारिया समुदाय में जन्म दर में कमी के विषय पर विशेषज्ञों से अध्ययन कराने और शोध रिपोर्ट तैयार करने का सुझाव भी सामने आया। साथ ही पातालकोट क्षेत्र के भारिया बहुल गांवों के समग्र विकास के लिए विशेष कार्य योजना पर जोर दिया गया। एक और महत्वपूर्ण सुझाव छात्रावासों को लेकर आया, जिसमें कहा गया कि विद्यार्थियों को चादर और अन्य सामग्री के लिए सीधे डीबीटी राशि देने के बजाय सामग्री उपलब्ध कराई जाए। इसके अलावा छात्रावासों और आश्रमों में अलग से अधीक्षक भर्ती करने की आवश्यकता जताई गई ताकि शिक्षक केवल शिक्षण कार्य पर ध्यान दे सकें।
बैठक में वनवासियों को भूमि पट्टे देने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सैटेलाइट इमेज को प्रमाण के रूप में मान्यता देने के प्रयासों का भी उल्लेख किया गया। साथ ही विभागीय अधिकारियों, विधायकों और जिला प्रशासन के बीच समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए गए। यह बैठक केवल समीक्षा तक सीमित नहीं दिखी, बल्कि जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, परिवहन और प्रशासनिक ढांचे में संभावित बदलावों का संकेत भी दे गई।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- यदि छात्रावासों का युक्तियुक्तकरण कर उन्हें ब्लॉक मुख्यालयों में केंद्रित किया जाएगा, तो क्या इससे दूरस्थ गांवों के विद्यार्थियों की पहुंच और मुश्किल नहीं हो जाएगी?
- विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए वर्षों से योजनाएं बनती रही हैं—इस बार ऐसा क्या अलग होगा जिससे जमीन पर वास्तविक बदलाव दिखे?
- फर्जी जाति प्रमाण पत्रों की जांच की बात हुई है—क्या सरकार समय-सीमा तय कर यह भी बताएगी कि अब तक कितने मामलों में कार्रवाई हुई और कितने लाभार्थियों पर असर पड़ा?
