गौरेला-पेंड्रा; पहले हर कदम पर था सहारे का इंतजार… अब व्हील चेयर ने स्वरूप सिंह को दी नई रफ्तार Aajtak24 News

गौरेला-पेंड्रा; पहले हर कदम पर था सहारे का इंतजार… अब व्हील चेयर ने स्वरूप सिंह को दी नई रफ्तार Aajtak24 News

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही - सुशासन तिहार 2026 कई जरूरतमंद लोगों के लिए उम्मीद और राहत का माध्यम बनता जा रहा है। जनपद पंचायत मरवाही के ग्राम पंचायत कटरा निवासी स्वरूप सिंह पोर्ते के जीवन में भी इस अभियान ने बड़ा बदलाव ला दिया। 80 प्रतिशत अस्थि बाधित दिव्यांग स्वरूप सिंह को व्हील चेयर मिलने के बाद अब उनकी जिंदगी पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान और आत्मनिर्भर हो गई है। दिव्यांगता के कारण स्वरूप सिंह पोर्ते को रोजमर्रा के कामों और घर से बाहर आने-जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। उनकी स्थिति ऐसी थी कि छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी उन्हें परिवार के लोगों पर निर्भर रहना पड़ता था। चलने-फिरने में असमर्थता ने उनकी जिंदगी को सीमित कर दिया था।

इसी बीच उन्हें सुशासन तिहार 2026 के तहत ग्राम पंचायत उषाड़ में आयोजित शिविर की जानकारी मिली। शिविर में पहुंचकर उन्होंने समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों को अपनी समस्या बताई और व्हील चेयर के लिए आवेदन किया। समाज कल्याण विभाग ने मामले को गंभीरता और संवेदनशीलता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई की। सहायक उपकरण वितरण योजना के तहत जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में स्वरूप सिंह पोर्ते को व्हील चेयर प्रदान की गई।

व्हील चेयर मिलने के बाद स्वरूप सिंह के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। अब उन्हें घर से बाहर निकलने और दैनिक कार्यों को करने में पहले जैसी कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ता। उन्होंने बताया कि पहले हर काम के लिए दूसरों का सहारा लेना पड़ता था, लेकिन अब वे खुद अधिक आत्मविश्वास और सुविधा के साथ अपने काम कर पा रहे हैं। परिवार के सदस्यों ने भी राहत महसूस की है, क्योंकि अब स्वरूप सिंह की देखभाल और आवाजाही पहले से आसान हो गई है। स्वरूप सिंह पोर्ते ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सहायता उनके लिए नई जिंदगी की तरह है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. यदि एक व्हील चेयर के लिए दिव्यांग व्यक्ति को शिविर का इंतजार करना पड़ा, तो क्या सामान्य दिनों में समाज कल्याण विभाग की पहुंच जरूरतमंदों तक पर्याप्त नहीं है?
  2. जिले में कितने दिव्यांग ऐसे हैं जिन्हें अब भी सहायक उपकरण नहीं मिल पाए हैं, और उन्हें चिन्हित करने के लिए क्या सक्रिय सर्वे किया जा रहा है?
  3. सुशासन तिहार में त्वरित समाधान की बात हो रही है, लेकिन क्या इन योजनाओं के लाभार्थियों की बाद में मॉनिटरिंग भी की जाती है ताकि उनकी अन्य जरूरतें भी पूरी हो सकें?

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