| सुकमा; झापरा शिविर में मौके पर मिले प्रमाण पत्र, किसानों को मिला डिजिटल सुरक्षा कवच Aajtak24 News |
सुकमा - प्रशासन को गांव तक पहुंचाने और लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर से राहत देने की कोशिश के तहत ग्राम पंचायत झापरा में आयोजित सुशासन शिविर ग्रामीणों के लिए राहत लेकर आया। कलेक्टर अमित कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर में प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और कई मामलों में मौके पर ही समाधान उपलब्ध कराया। शिविर में लोगों को केवल आवेदन देने तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, प्रमाण पत्र प्रक्रिया और सरकारी सुविधाओं की जानकारी भी दी गई ताकि ग्रामीण भविष्य में भी सेवाओं का लाभ आसानी से ले सकें।
मौके पर बांटे गए 35 दस्तावेज, लोगों को मिली राहत
शिविर के दौरान सुकमा तहसीलदार गिरीश निम्बालकर, सरपंच मुन्नी मड़कामी और उपसरपंच प्रवीण बारसे की मौजूदगी में ग्रामीणों को विभिन्न दस्तावेज वितरित किए गए। प्रशासन ने शिविर में 8 जाति प्रमाण पत्र, 12 निवास प्रमाण पत्र, 8 किसान किताब और 2 नामांतरण आदेश जारी किए। इससे शिक्षा, रोजगार और राजस्व संबंधी मामलों में ग्रामीणों को तत्काल राहत मिली।
किसानों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की पहल
शिविर की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि किसानों को डिजिटल कृषि व्यवस्था से जोड़ना भी रही। शिविर में 5 किसानों का एग्रीस्टैक पंजीयन किया गया। प्रशासन का मानना है कि इससे किसानों को भविष्य में कृषि संबंधी सेवाओं, योजनाओं और लाभों तक अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी पहुंच मिल सकेगी। स्थानीय स्तर पर इस पहल को प्रशासन और ग्रामीणों के बीच विश्वास बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अधिकारियों ने कहा कि ऐसे शिविरों का उद्देश्य केवल सेवा वितरण नहीं बल्कि लोगों को अधिकारों और योजनाओं तक वास्तविक पहुंच दिलाना है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- यदि प्रमाण पत्र और राजस्व सेवाएं शिविर में मौके पर दी जा सकती हैं, तो सामान्य दिनों में इन्हीं सेवाओं के लिए लोगों को लंबा इंतजार क्यों करना पड़ता है?
- एग्रीस्टैक पंजीयन को बड़ी उपलब्धि बताया जा रहा है, लेकिन जिले के कुल किसानों में अब तक कितने प्रतिशत किसानों को इससे जोड़ा गया है?
- क्या शिविर में दिए गए समाधान और जारी दस्तावेजों की बाद में स्वतंत्र समीक्षा होगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि प्रक्रिया केवल कार्यक्रम तक सीमित न रह जाए?