| जांजगीर; टोपी-सीटी से बदलेगी गांव की तस्वीर या सिर्फ दिखावा? पामगढ़ पुलिस ने दर्री में उतारी ‘महिला कमांडो टीम Aajtak24 News |
जांजगीर-चांपा - ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते साइबर अपराध, नशे की समस्या और महिला सुरक्षा को लेकर पुलिस प्रशासन अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर सामुदायिक भागीदारी का मॉडल तैयार करने की कोशिश कर रहा है। इसी कड़ी में थाना पामगढ़ पुलिस ने ग्राम पंचायत दर्री में एक विशेष जन-जागरूकता अभियान आयोजित किया, जिसमें नशा मुक्ति, साइबर सुरक्षा, महिला संरक्षण और सड़क सुरक्षा जैसे विषयों को केंद्र में रखा गया।
यह अभियान पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय (IPS) के निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उमेश कुमार कश्यप के मार्गदर्शन में संचालित किया गया। थाना प्रभारी सावन कुमार सारथी स्वयं गांव पहुंचे और ग्रामीणों के साथ संवाद स्थापित किया।
महिला कमांडो टीम: सुरक्षा की नई जिम्मेदारी गांव की महिलाओं के हाथ
कार्यक्रम का सबसे प्रमुख हिस्सा रहा—महिला कमांडो टीम का गठन।
इस पहल के तहत गांव की महिलाओं को केवल जागरूक नहीं किया गया, बल्कि उन्हें स्थानीय स्तर पर सुरक्षा और सूचना तंत्र का हिस्सा बनाने की कोशिश भी की गई। महिलाओं को टोपी और सीटी वितरित कर उन्हें सामाजिक जागरूकता गतिविधियों में भागीदारी के लिए प्रेरित किया गया। पुलिस अधिकारियों ने महिलाओं से कहा कि वे गांव में अपराध रोकथाम, संदिग्ध गतिविधियों की सूचना और महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों में सक्रिय भूमिका निभाएं। हालांकि यह पहल केवल प्रतीकात्मक न रह जाए, इसके लिए आगे नियमित प्रशिक्षण और फॉलोअप भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
साइबर अपराध पर चेतावनी: मोबाइल के जरिए बढ़ते खतरे पर समझाइश
अभियान के दौरान ग्रामीणों को ऑनलाइन ठगी, फर्जी लिंक, बैंकिंग फ्रॉड, OTP साझा करने के जोखिम और डिजिटल सुरक्षा के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। महिलाओं को बताया गया कि सोशल मीडिया और मोबाइल एप्लिकेशन के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराध भी तेजी से बदल रहे हैं और जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।
नशा मुक्ति अभियान: युवाओं को दी गई सामाजिक जिम्मेदारी की सीख
कार्यक्रम में नशा मुक्ति को विशेष प्राथमिकता दी गई। पुलिस अधिकारियों ने युवाओं और ग्रामीणों को शराब तथा अन्य नशीले पदार्थों के सामाजिक, आर्थिक और पारिवारिक दुष्प्रभावों के बारे में बताया। गांव स्तर पर ऐसे अभियान इसलिए भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं क्योंकि कई बार नशे से जुड़ी समस्याएं अपराध, घरेलू विवाद और सामाजिक असुरक्षा को बढ़ावा देती हैं।
महिला सुरक्षा और कानून की जानकारी भी बनी अभियान का हिस्सा
अभियान में घरेलू हिंसा, छेड़छाड़, बाल विवाह और महिला संबंधी अपराधों पर भी चर्चा की गई। महिलाओं को बताया गया कि किसी भी प्रकार की आपात स्थिति में पुलिस सहायता लेने में संकोच न करें और कानून उनके साथ खड़ा है। साथ ही सड़क सुरक्षा के तहत हेलमेट, सीट बेल्ट और राहगीरों की सुरक्षा के लिए संचालित योजनाओं की भी जानकारी दी गई।
क्या ऐसे अभियान गांवों में बदलाव ला पाएंगे?
ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस की मौजूदगी और संवाद आधारित अभियान भरोसा बनाने की दिशा में सकारात्मक कदम माने जा रहे हैं। लेकिन किसी भी अभियान की वास्तविक सफलता केवल आयोजन से नहीं बल्कि उसके बाद होने वाली निगरानी, प्रशिक्षण और परिणामों से तय होती है। महिला कमांडो टीम कितनी सक्रिय रहती है और नशा व साइबर अपराध पर कितना असर पड़ता है—इस पर आगे नजर रहेगी।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
1. महिला कमांडो टीम का गठन तो किया गया, लेकिन क्या इनके लिए कोई नियमित प्रशिक्षण, समीक्षा बैठक और जवाबदेही तंत्र भी तय किया गया है?
2. पिछले एक वर्ष में थाना पामगढ़ क्षेत्र में साइबर अपराध और नशे से जुड़े मामलों में कितनी वृद्धि या कमी दर्ज हुई और इस अभियान का मूल्यांकन किस आधार पर होगा?
3. टोपी और सीटी वितरण के अलावा क्या महिला कमांडो टीम को किसी आपात स्थिति में तत्काल पुलिस संपर्क, डिजिटल रिपोर्टिंग या विशेष अधिकार जैसी व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जाएगी?