सीधी के समर कैंप में ‘पृथ्वी बचाओ-जल बचाओ’ थीम पर दिखी नन्हे कलाकारों की सोच Aajtak24 News

सीधी के समर कैंप में ‘पृथ्वी बचाओ-जल बचाओ’ थीम पर दिखी नन्हे कलाकारों की सोच Aajtak24 News

सीधी - गर्मी की छुट्टियों को केवल मनोरंजन तक सीमित न रखकर बच्चों के व्यक्तित्व और सामाजिक सोच को विकसित करने की दिशा में मॉडल स्कूल मझौली में विशेष शिक्षण समर कैंप का आयोजन किया जा रहा है। कैंप के दूसरे दिन छात्र-छात्राओं के बीच “पृथ्वी बचाओ, जल बचाओ एवं स्वच्छता” विषय पर ड्राइंग और पेंटिंग प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें बच्चों ने रंगों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुई। प्रतियोगिता में बच्चों ने जल संरक्षण, स्वच्छता और पृथ्वी को बचाने जैसे विषयों पर अपनी रचनात्मक प्रतिभा दिखाई। कई बच्चों ने चित्रों के जरिए बढ़ते प्रदूषण, जल संकट और पर्यावरण संरक्षण की जरूरत को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

यह विशेष समर कैंप कलेक्टर के निर्देशानुसार 27 मई से शुरू हुआ है, जो 31 मई तक संचालित होगा। कैंप का उद्देश्य विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के साथ उनमें सामाजिक और राष्ट्रीय दायित्वों के प्रति जागरूकता पैदा करना है। इसी उद्देश्य से प्रतिदिन अलग-अलग विषयों पर रचनात्मक और शैक्षणिक गतिविधियां कराई जा रही हैं।कार्यक्रम का संचालन विकासखंड समन्वयक अयोध्या प्रसाद पटेल, नोडल अधिकारी एवं मॉडल स्कूल की प्राचार्य इंदिरा कचेर, बीएसी कमलाकर सिंह, जन शिक्षक पदमधर द्विवेदी और संतोष कुमार वर्मा के मार्गदर्शन में किया गया।

समर कैंप में विजय पाल कोरी, सनत तिवारी, राजेंद्र प्रसाद गुप्ता, आराधना गुप्ता सहित कई शिक्षक और अभिभावक भी मौजूद रहे और बच्चों का उत्साहवर्धन किया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की गतिविधियां बच्चों में रचनात्मकता, सामाजिक जिम्मेदारी और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. क्या ऐसे समर कैंप केवल चुनिंदा मॉडल स्कूलों तक सीमित रहेंगे, या ग्रामीण और सरकारी स्कूलों के सभी बच्चों तक भी पहुंचाए जाएंगे?
  2. बच्चों को ‘जल बचाओ’ और ‘स्वच्छता’ का संदेश देने के साथ क्या स्कूलों में खुद पर्याप्त स्वच्छ पेयजल और साफ शौचालय उपलब्ध हैं?
  3. क्या शिक्षा विभाग ने यह आकलन किया है कि ग्रीष्मकालीन शिविरों का बच्चों के सीखने और व्यवहारिक विकास पर वास्तविक असर कितना पड़ रहा है?

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