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| अशोकनगर; सीएम हेल्पलाइन पर ढिलाई पड़ी भारी: कलेक्टर का एक्शन, जवाब नहीं तो नोटिस तैयार Aajtak24 News |
अशोकनगर - सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों के निराकरण में लापरवाही और जिले की ग्रेडिंग में सुधार नहीं होने पर अशोकनगर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर साकेत मालवीय ने समय-सीमा के लंबित पत्रों की समीक्षा बैठक में स्पष्ट संदेश दिया कि केवल बैठकों में रिपोर्ट देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि शिकायतों का वास्तविक समाधान और पोर्टल पर प्रदर्शन दोनों दिखाई देना चाहिए। सोमवार को आयोजित समीक्षा बैठक में जब लंबित सीएम हेल्पलाइन शिकायतों की स्थिति देखी गई तो कई विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए। समीक्षा के दौरान पाया गया कि शिकायतों के निराकरण में अपेक्षित रुचि नहीं ली जा रही है और ग्रेडिंग सुधारने की दिशा में भी प्रभावी प्रयास नहीं किए गए। इसका असर जिले की समग्र रैंकिंग और प्रशासनिक प्रदर्शन पर पड़ा।
इसी के चलते कई विभागीय अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए। इनमें सहकारिता, हथकरघा एवं ग्रामोद्योग, मत्स्य, जनजातीय कार्य, पशुपालन एवं डेयरी, स्वास्थ्य, श्रम और शिक्षा विभाग के अधिकारी शामिल हैं। बैठक में केवल शिकायतों की समीक्षा ही नहीं हुई बल्कि सीएम डैशबोर्ड पर विभागीय प्रगति की भी जांच की गई। यहां गेहूं खरीदी और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) से संबंधित जानकारी शून्य पाए जाने पर कृषि विभाग से जवाब मांगा गया। वहीं पशुपालन विभाग में टीकाकरण और केसीसी से संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं होने पर भी कार्रवाई की गई।
प्रशासन का यह कदम साफ संकेत देता है कि अब केवल आंकड़ों का प्रबंधन नहीं बल्कि वास्तविक कार्य और उसकी डिजिटल रिपोर्टिंग दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण मानी जाएंगी। हालांकि बड़ा सवाल यह भी है कि नोटिस के बाद जमीनी सुधार कितनी तेजी से दिखाई देता है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- सीएम हेल्पलाइन शिकायतों के निराकरण में लगातार लापरवाही हो रही थी तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई पहले क्यों नहीं हुई?
- यदि सीएम डैशबोर्ड पर गेहूं खरीदी, केसीसी और टीकाकरण जैसी जानकारी शून्य थी, तो क्या वास्तव में काम नहीं हुआ या डेटा अपडेट नहीं किया गया—और दोनों में जिम्मेदारी किसकी है?
- कारण बताओ नोटिस के बाद क्या केवल जवाब लेकर मामला खत्म होगा या खराब प्रदर्शन पर वास्तविक प्रशासनिक कार्रवाई भी तय की जाएगी?
