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| बैतूल; घटिया काम मिला तो सीधे जिम्मेदारी तय होगी! कलेक्टर का अफसरों को कड़ा संदेश Aajtak24 News |
बैतूल - जिले में विकास कार्यों की धीमी रफ्तार, अधूरे निर्माण और शासकीय जमीनों पर बढ़ते अतिक्रमण को लेकर प्रशासन अब सख्त रुख अपनाता नजर आ रहा है। कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित नगरीय निकायों की समीक्षा बैठक में कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे ने साफ शब्दों में कहा कि विकास कार्यों में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा और लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
बैठक में नगर पालिकाओं और नगर परिषदों द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्यों और योजनाओं की विस्तार से समीक्षा की गई। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शासन की योजनाओं का लाभ समय सीमा में आमजन तक पहुंचे और कार्यों में पारदर्शिता तथा गुणवत्ता दोनों सुनिश्चित हों। उन्होंने कहा कि जनता को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
शासकीय भूमि पर अतिक्रमण के मामलों को लेकर बैठक में सबसे सख्त रुख देखने को मिला। कलेक्टर ने कहा कि नगर पालिकाओं को आवंटित सरकारी जमीनों पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में जिम्मेदारों की जवाबदेही तय कर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
पीएम स्वनिधि योजना की समीक्षा के दौरान आमला और बैतूल बाजार नगर परिषद की धीमी प्रगति पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई। वहीं प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शाहपुर, चिचोली और बैतूल बाजार में अधूरे आवासों को जून से पहले पूरा कराने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि पात्र हितग्राहियों को समय पर लाभ मिलना चाहिए और निर्माण कार्यों में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए।
राजस्व वसूली की समीक्षा में संपत्तिकर और अन्य करों की कमजोर वसूली पर भी चिंता जताई गई। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वित्तीय संसाधनों को मजबूत कर विकास कार्यों को गति दी जाए। मुख्यमंत्री अधोसंरचना विकास योजना के अंतर्गत चल रहे कार्यों की भी समीक्षा की गई और उन्हें तय समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में नगरीय क्षेत्रों की साफ-सफाई, स्ट्रीट लाइट, नालियों और डिवाइडर रखरखाव पर भी चर्चा हुई। भैंसदेही नगर परिषद की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कलेक्टर ने अन्य निकायों को भी उसी स्तर पर काम करने के निर्देश दिए। साथ ही बारिश से पहले नालों और नालियों की सफाई सुनिश्चित करने तथा जलभराव वाले क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया।
अमृत 2.0 योजना और जल गंगा संवर्धन अभियान की समीक्षा के दौरान जल संरक्षण और नगरीय जल प्रबंधन कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। पेयजल संकट से जुड़े मामलों के त्वरित निराकरण पर भी जोर दिया गया। वहीं सीएम हेल्पलाइन की समीक्षा में बैतूल, आठनेर और घोड़ाडोंगरी के सीएमओ को लंबित शिकायतों के जल्द निराकरण के निर्देश दिए गए।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- शासकीय जमीनों पर अतिक्रमण को लेकर प्रशासन सख्ती की बात कर रहा है, लेकिन क्या अब तक किसी जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई हुई है जिसने अवैध कब्जे रोकने में लापरवाही बरती?
- प्रधानमंत्री आवास योजना में कई आवास अब भी अधूरे हैं, तो क्या प्रशासन यह माने कि हितग्राहियों को समय पर लाभ पहुंचाने में स्थानीय निकाय विफल रहे हैं?
- हर बारिश से पहले नालों की सफाई और जलभराव रोकने के निर्देश दिए जाते हैं, फिर भी शहरों में बारिश के दौरान सड़कें तालाब क्यों बन जाती हैं? क्या पिछले वर्षों की जिम्मेदारी तय हुई?
