| बस्तर के युवाओं ने बदला नजरिया, हिमाचल से लौटे नए सपनों के साथ Aajtak24 News |
जगदलपुर - बस्तर के युवाओं को किताबों और कक्षाओं से आगे निकालकर अनुभव आधारित शिक्षा से जोड़ने की दिशा में जिला प्रशासन की पहल ने एक नया उदाहरण पेश किया है। जगदलपुर जिले के 16 सदस्यीय युवा दल ने हिमाचल प्रदेश के बीर में आयोजित ‘प्लेस ऑफ पॉसिबिलिटीज यूथ फेस्टिवल’ में भाग लेकर न केवल राज्य का प्रतिनिधित्व किया बल्कि अपने अनुभवों के साथ नई सोच भी लेकर लौटे। कलेक्टर आकाश छिकारा और जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन के मार्गदर्शन में इस अध्ययन भ्रमण का आयोजन किया गया। युवाओं को 10 मई को रवाना किया गया था और 20 मई को दल वापस जगदलपुर लौटा।
इस यात्रा का उद्देश्य केवल पर्यटन नहीं था, बल्कि युवाओं में लाइफ स्किल्स, नेतृत्व क्षमता, सामुदायिक सोच, प्रकृति आधारित सीख और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना था। इस पूरे कार्यक्रम में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बड़ेमुरमा के व्याख्याता मनीष कुमार अहीर ने नोडल अधिकारी की भूमिका निभाई। दस दिवसीय भ्रमण के दौरान युवा दल ने देश की राजधानी दिल्ली में इंडिया गेट का भ्रमण किया और इसके बाद हिमाचल प्रदेश के बीर पहुंचकर वहां की विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लिया। प्रतिभागियों ने विश्व प्रसिद्ध पैराग्लाइडिंग क्षेत्र, प्राकृतिक स्थलों और सांस्कृतिक गतिविधियों का अनुभव प्राप्त किया।
कार्यक्रम के दौरान युवाओं ने ह्यूमन लाइब्रेरी, योग, नेचर वॉक, ट्रेकिंग, कैंपिंग, स्किल डेवलपमेंट गतिविधियां और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी की। लेकिन इस पूरे अनुभव का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वह कैंप रहा जहां युवाओं ने सामुदायिक जीवन, परिवार, समाज और अपने भविष्य को लेकर खुलकर चर्चा की। समूह गतिविधियों, नाट्य प्रस्तुतियों और अनुभव साझा करने के सत्रों ने युवाओं को आत्मविश्वास, नेतृत्व और टीमवर्क की व्यावहारिक समझ दी।
जिला प्रशासन का मानना है कि ऐसे अनुभव युवाओं को प्रतियोगी माहौल, सामाजिक समझ और व्यक्तित्व विकास की दिशा में आगे बढ़ाते हैं। हालांकि अब देखने वाली बात यह होगी कि इस तरह के अध्ययन भ्रमण का प्रभाव युवाओं के जीवन और स्थानीय समुदायों में किस रूप में दिखाई देता है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
1. इस अध्ययन भ्रमण के लिए युवाओं का चयन किन मानकों पर किया गया और क्या चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी थी?
2. इस कार्यक्रम पर कुल कितना खर्च हुआ और इसके परिणामों को मापने के लिए क्या कोई मूल्यांकन प्रणाली बनाई गई है?
3. भ्रमण से लौटे युवाओं के अनुभवों को बस्तर के अन्य स्कूलों और छात्रों तक पहुंचाने के लिए क्या कोई फॉलो-अप कार्यक्रम तैयार किया गया है?