| बीजापुर; जब सरकारी स्टॉल पर उमड़ी भीड़: ‘जनमन’ और योजनाओं की किताबों ने मिरतुर शिविर में खींचा ग्रामीणों का ध्यान Aajtak24 News |
बीजापुर - जिले के भैरमगढ़ विकासखंड स्थित मिरतुर में आयोजित सुशासन तिहार के समाधान शिविर में इस बार केवल समस्याओं के समाधान ही नहीं, बल्कि जानकारी और जागरूकता का भी खास माहौल देखने को मिला। शिविर में जनसंपर्क विभाग द्वारा लगाया गया स्टॉल ग्रामीणों, युवाओं और महिलाओं के आकर्षण का केंद्र बन गया, जहां शासन की योजनाओं और विकास कार्यों से जुड़ी प्रचार सामग्री का निःशुल्क वितरण किया गया। जनसंपर्क विभाग ने स्टॉल के माध्यम से छत्तीसगढ़ शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यक्रमों को सरल तरीके से लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया। ग्रामीणों को मासिक पत्रिका ‘जनमन’ के साथ-साथ “सुशासन के नवीन आयाम”, “तब और अब”, “विकसित भारत के बढ़ते कदम”, “बिल्डिंग टूमारो छग टुडे” और “अटल निर्माण वर्ष-2 साल रिपोर्ट कार्ड” जैसी पुस्तिकाएं वितरित की गईं।
स्टॉल में पहुंचे लोगों को योजनाओं की जानकारी आसान भाषा और आकर्षक प्रस्तुति के जरिए समझाई गई। ग्रामीणों ने शासन की विभिन्न योजनाओं, विकास कार्यों और प्रदेश में हो रहे बदलावों से जुड़ी जानकारियों में रुचि दिखाई। बड़ी संख्या में लोगों ने प्रचार सामग्री प्राप्त कर योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी ली। विशेष रूप से युवाओं और महिलाओं में सरकारी योजनाओं से जुड़ी पुस्तिकाओं को लेकर उत्सुकता देखी गई। कई ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें पहली बार एक ही स्थान पर इतनी योजनाओं की जानकारी व्यवस्थित तरीके से मिल रही है। इससे उन्हें यह समझने में मदद मिली कि वे किन योजनाओं के लिए पात्र हैं और किस तरह उनका लाभ लिया जा सकता है।
समाधान शिविर में जनसंपर्क विभाग का स्टॉल केवल प्रचार का माध्यम नहीं रहा, बल्कि यह लोगों और शासन के बीच संवाद का केंद्र भी बनकर उभरा। प्रशासन का उद्देश्य था कि ग्रामीण केवल योजनाओं का नाम ही न जानें, बल्कि उनकी प्रक्रिया और लाभ के बारे में भी जागरूक हों। सुशासन तिहार के तहत आयोजित इस शिविर में विभागीय स्टॉलों के जरिए शासन की योजनाओं को सीधे जनता तक पहुंचाने का प्रयास किया गया, ताकि ग्रामीणों को सूचना के अभाव में किसी भी योजना से वंचित न रहना पड़े।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- सरकारी योजनाओं के प्रचार के लिए पुस्तिकाएं और स्टॉल लगाए जा रहे हैं, लेकिन क्या प्रशासन के पास यह आंकड़ा है कि इन योजनाओं का वास्तविक लाभ कितने पात्र ग्रामीणों तक जमीन पर पहुंचा है?
- यदि योजनाओं की जानकारी देने के लिए अलग से शिविर और प्रचार सामग्री की जरूरत पड़ रही है, तो क्या यह माना जाए कि सामान्य सरकारी तंत्र और सूचना प्रणाली गांवों तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पा रही है?
- ‘तब और अब’ तथा ‘रिपोर्ट कार्ड’ जैसी प्रचार सामग्री बांटी जा रही है, लेकिन क्या प्रशासन उन अधूरी या धीमी परियोजनाओं का भी सार्वजनिक ब्यौरा देगा जिनका लाभ अब तक ग्रामीणों को नहीं मिल पाया है?