सक्ती; अफवाहों पर ब्रेक, अधिकारियों पर सख्ती: कलेक्टर की बैठक में साफ संदेश Aajtak24 News

सक्ती; अफवाहों पर ब्रेक, अधिकारियों पर सख्ती: कलेक्टर की बैठक में साफ संदेश Aajtak24 News

सक्ती - जिले में सुशासन तिहार के तहत आयोजित हो रहे जनसमस्या समाधान शिविरों को लेकर प्रशासन ने अब और सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है। कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित साप्ताहिक समय-सीमा की बैठक में कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी अमृत विकास तोपनो ने विभागीय योजनाओं, निर्माण कार्यों और लंबित मामलों की विस्तार से समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि समाधान शिविर केवल औपचारिकता न बनें, बल्कि आम नागरिकों को मौके पर राहत मिलनी चाहिए। बैठक में कलेक्टर ने कहा कि सुशासन तिहार का उद्देश्य केवल आवेदन लेना नहीं, बल्कि त्वरित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण समाधान देना है। उन्होंने सभी जिला स्तरीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे समाधान शिविरों में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें और प्राप्त शिकायतों एवं आवेदनों का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण सुनिश्चित करें।

बैठक के दौरान स्वास्थ्य विभाग को शिविरों में बेहतर चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए ताकि ग्रामीणों को मौके पर इलाज और स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। साथ ही अधिकारियों को कहा गया कि योजनाओं की जानकारी गांव स्तर तक पहुंचाई जाए ताकि पात्र हितग्राही लाभ से वंचित न रहें। इस समीक्षा बैठक का एक महत्वपूर्ण पहलू पेट्रोल-डीजल को लेकर प्रशासन की सार्वजनिक अपील भी रही। कलेक्टर ने नागरिकों से कहा कि किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और आवश्यकता के अनुसार ही पेट्रोल-डीजल का उपयोग करें। प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि जिले में आपूर्ति व्यवस्था को लगातार मॉनिटर किया जा रहा है और अनावश्यक खरीद एवं भंडारण से बचना चाहिए।

गर्मी के बढ़ते असर को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को सभी एम्बुलेंस सेवाएं सक्रिय और दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए। वहीं बिजली विभाग को निर्बाध विद्युत आपूर्ति बनाए रखने और सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया गया। बैठक में लोक सेवा गारंटी, लंबित पेंशन प्रकरण, राजस्व विवाद, नामांतरण, सीमांकन, खाता विभाजन, नक्शा बटांकन, आधार प्रविष्टि सहित कई प्रशासनिक विषयों की समीक्षा की गई। साथ ही विभागवार लंबित प्रकरणों और जनदर्शन व जनचौपाल में प्राप्त शिकायतों के त्वरित निराकरण के निर्देश भी दिए गए। प्रशासनिक संकेत साफ रहे—अब केवल समीक्षा नहीं, बल्कि परिणाम देने वाले कामों पर फोकस रहेगा।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. अगर समाधान शिविरों में बड़ी संख्या में आवेदन अभी भी लंबित हैं, तो क्या प्रशासन समाधान शिविरों की प्रभावशीलता मापने के लिए कोई सार्वजनिक रिपोर्ट जारी करेगा?
  2. पेट्रोल-डीजल को लेकर अफवाहों से बचने की अपील की गई है—क्या जिले में आपूर्ति बाधित होने या असामान्य खरीद के संकेत प्रशासन को पहले से मिले थे?
  3. बैठकों में लगातार लंबित प्रकरणों के त्वरित निराकरण के निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन तय समयसीमा के बाद भी काम न करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने का तंत्र क्या है?

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