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| टीकमगढ़; तालाबों पर कब्जा किया तो अब नहीं मिलेगी राहत: वेटलैंड सुरक्षा पर प्रशासन का सख्त संदेश Aajtak24 News |
टीकमगढ़ - मानसून से पहले जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को लेकर टीकमगढ़ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय की अध्यक्षता में आयोजित जिला आर्द्रभूमि प्राधिकरण की बैठक में वेटलैंड, तालाबों और जलाशयों की सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए और साफ किया गया कि जल स्रोतों पर अतिक्रमण या नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई होगी। कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित बैठक में जिला स्तरीय वेटलैंड संरक्षण समिति के गठन के साथ राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) से जुड़े कार्यों की समीक्षा की गई। समिति को जिले के तालाबों, वेटलैंड और जलाशयों से अतिक्रमण हटाने तथा उनकी समुचित देखरेख सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई।
बैठक में स्पष्ट किया गया कि वेटलैंड नियमों के तहत जल स्रोतों की भूमि पर कब्जा करना, उनका उपयोग बदलना या नए उद्योग स्थापित करना प्रतिबंधित रहेगा। प्रशासन ने यह भी साफ किया कि मौजूदा उद्योगों के अनियंत्रित विस्तार की अनुमति भी नियमों के दायरे में ही होगी। इसके अलावा निर्माण मलबा, कचरा और ई-कचरा फेंकना, अशोधित सीवेज या अपशिष्ट का जल स्रोतों में निस्सारण करना भी पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। प्रशासन ने विशेष रूप से चेतावनी दी कि वेटलैंड, तालाब या जलाशय के भीतर और उसके एफटीएल (फुल टैंक लेवल) से 50 मीटर की परिधि में पक्का निर्माण नहीं किया जा सकेगा, नाव घाट जैसी सीमित गतिविधियों को छोड़कर।
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि पक्षियों और अन्य जीवों के शिकार जैसी गतिविधियां भी प्रतिबंधित हैं और नियमों के उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। पर्यावरण विशेषज्ञ लंबे समय से चेतावनी देते रहे हैं कि जल स्रोतों पर बढ़ते अतिक्रमण और प्रदूषण का असर केवल पानी की उपलब्धता नहीं बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी और भूजल स्तर पर भी पड़ता है। ऐसे में यह बैठक संरक्षण की दिशा में प्रशासनिक संकेत मानी जा रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि क्या यह सख्ती जमीन पर अतिक्रमण हटाने और निगरानी तक भी पहुंचेगी या बैठकों तक सीमित रह जाएगी।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- यदि तालाबों और वेटलैंड पर अतिक्रमण पहले से मौजूद हैं, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई और जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
- वेटलैंड के 50 मीटर दायरे में निर्माण प्रतिबंध लागू कराने के लिए क्या जिले में सर्वे और सार्वजनिक सूची जारी की जाएगी?
- क्या प्रशासन उन पुराने मामलों की भी समीक्षा करेगा जहां जलाशयों की जमीन का उपयोग बदल चुका है या कार्रवाई केवल नए मामलों तक सीमित रहेगी?
