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| सीधी; भाषणों से बचेगी जैव विविधता या बदलेगी जिंदगी? कॉलेज में उठी धरती बचाने की आवाज Aajtak24 News |
सीधी - पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता को लेकर बढ़ती वैश्विक चिंता के बीच सीधी जिले के प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस संजय गांधी स्मृति शासकीय स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय के इको क्लब द्वारा किया गया, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को प्रकृति संरक्षण की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करना रहा। इस वर्ष विश्व जैव विविधता दिवस की थीम “Acting Locally for Global Impact” रखी गई, जिसका संदेश था कि स्थानीय स्तर पर किए गए छोटे प्रयास भी वैश्विक पर्यावरणीय बदलाव ला सकते हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत इको क्लब प्रभारी डॉ. दिवाकर सिंह द्वारा विषय की रूपरेखा प्रस्तुत करने के साथ हुई। उन्होंने जैव विविधता संरक्षण की आवश्यकता और वर्तमान समय में इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में वक्ताओं ने छात्रों को यह समझाने का प्रयास किया कि जैव विविधता केवल जंगलों और वन्यजीवों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध मानव जीवन, खाद्य सुरक्षा, जलवायु संतुलन और भविष्य की पीढ़ियों से भी है।
मुख्य वक्ता डॉ. आई.पी. प्रजापति ने उदाहरणों के माध्यम से बताया कि स्थानीय स्तर पर अपनाई गई पर्यावरण-अनुकूल आदतें बड़े स्तर पर प्रभाव डाल सकती हैं। वहीं प्राचार्य डॉ. प्रभाकर सिंह ने कहा कि जैव विविधता संरक्षण को औपचारिक कार्यक्रमों से आगे बढ़ाकर जीवनशैली का हिस्सा बनाना होगा। कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षकों, स्टाफ और इको क्लब के सदस्यों की उपस्थिति रही। आयोजन ने छात्रों के बीच पर्यावरणीय जिम्मेदारी और स्थानीय भागीदारी का संदेश देने का प्रयास किया। हालांकि हर वर्ष ऐसे आयोजन होते हैं, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या जागरूकता कार्यक्रम कैंपस से बाहर निकलकर व्यवहार और नीतिगत बदलाव तक पहुंच पा रहे हैं।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
1. जैव विविधता दिवस पर कार्यक्रम आयोजित करने के अलावा महाविद्यालय ने पिछले एक वर्ष में पर्यावरण संरक्षण के लिए कौन से मापनीय और स्थायी कदम उठाए हैं?
2. क्या कॉलेज परिसर में जल संरक्षण, जैविक अपशिष्ट प्रबंधन, पौधारोपण की जीवित दर और जैव विविधता ऑडिट जैसी कोई व्यवस्था लागू है?
3. छात्रों को पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाने के बाद क्या उनके व्यवहार परिवर्तन और वास्तविक भागीदारी को मापने के लिए कोई वार्षिक मूल्यांकन प्रणाली बनाई गई है?
