| बिलासपुर; अब गांव की महिलाएं बनेंगी ‘पशु डॉक्टर’! पशु सखी प्रशिक्षण ने बदली तस्वीर Aajtak24 News |
बिलासपुर - ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और गांवों में पशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में बिलासपुर में एक अनोखी पहल सामने आई है। भारतीय स्टेट बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) द्वारा आयोजित 15 दिवसीय “पशु सखी प्रशिक्षण कार्यक्रम” का सफल समापन हुआ, जिसमें महिलाओं को पशुपालन से जुड़ी तकनीकी और व्यवहारिक जानकारी देकर स्वरोजगार के लिए तैयार किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत पशु चिकित्सा विभाग की डॉ. रंजना नंदा और डॉ. तन्मय ओट्लवार की उपस्थिति में हुई थी। समापन अवसर पर अधिकारियों ने कहा कि प्रशिक्षित “पशु सखियां” गांवों में पशुओं की देखभाल, बीमारियों की शुरुआती पहचान, टीकाकरण के प्रति जागरूकता और प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाएंगी।
प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को पशुओं के स्वास्थ्य परीक्षण, संतुलित आहार प्रबंधन, सामान्य बीमारियों की पहचान, समय पर टीकाकरण और आपातकालीन स्थिति में देखभाल संबंधी व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इसके अलावा संवाद कौशल भी सिखाया गया ताकि वे गांव के पशुपालकों को बेहतर सलाह और मार्गदर्शन दे सकें। आरसेटी प्रबंधन ने कहा कि यह प्रशिक्षण केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का माध्यम भी है। प्रशिक्षित महिलाएं गांव स्तर पर पशुपालन आधारित सेवाएं देकर सम्मानजनक आय अर्जित कर सकेंगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका मजबूत कर पाएंगी।
कार्यक्रम में शामिल महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिला। प्रशिक्षणार्थियों का कहना है कि इस प्रशिक्षण से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और अब वे गांवों में पशु स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए खुद को सक्षम महसूस कर रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां अक्सर पशु चिकित्सकीय सुविधाएं समय पर नहीं पहुंच पातीं, वहां “पशु सखी” जैसी पहल को पशुपालकों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- प्रशिक्षण पूरा होने के बाद क्या इन “पशु सखियों” को कोई औपचारिक जिम्मेदारी, मानदेय या रोजगार मॉडल भी दिया जाएगा, या यह केवल प्रमाणपत्र तक सीमित रहेगा?
- ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से पशु चिकित्सा सेवाओं की कमी रही है, तो क्या यह प्रशिक्षण सरकारी व्यवस्था की कमी को भरने की कोशिश है?
- क्या प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि प्रशिक्षित महिलाओं को गांवों में दवाइयों, उपकरणों और तकनीकी सहयोग की नियमित सुविधा भी मिले?