कलेक्ट्रेट पहुंचीं उम्मीदें: किसी ने मांगी इलाज की मदद, किसी ने घर… जनदर्शन में खुलीं जमीनी Aajtak24 News

कलेक्ट्रेट पहुंचीं उम्मीदें: किसी ने मांगी इलाज की मदद, किसी ने घर… जनदर्शन में खुलीं जमीनी Aajtak24 News

सक्ती - जिला मुख्यालय में आयोजित साप्ताहिक जनदर्शन एक बार फिर आम नागरिकों की उम्मीदों और प्रशासन की जवाबदेही का मंच बना। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी श्री अमृत विकास तोपनो ने जिले के विभिन्न दूरस्थ क्षेत्रों से पहुंचे लोगों की समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को मामलों के त्वरित एवं नियमानुसार निराकरण के निर्देश दिए।

इस जनदर्शन में कुल 20 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें सामाजिक सहायता, आवास, चिकित्सा सहायता, रोजगार, राजस्व विवाद और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे। कलेक्टर ने प्राप्त आवेदनों को संबंधित विभागीय अधिकारियों को सौंपते हुए कहा कि ऐसे मामलों में अनावश्यक विलंब न हो और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

जनदर्शन में कई ऐसे मामले सामने आए जो ग्रामीण जीवन की वास्तविक चुनौतियों को सामने लाते हैं। किसी ने दिव्यांगता के आधार पर अनुदान की मांग की, तो किसी ने आंधी-बारिश में क्षतिग्रस्त मकान के लिए सहायता की गुहार लगाई। एक आवेदक ने गंभीर बीमारी के इलाज हेतु मुख्यमंत्री राहत कोष से आर्थिक सहायता का अनुरोध किया, वहीं सीमांकन, रोजगार और पेयजल से जुड़े आवेदन भी सामने आए।

तहसील सक्ती के ग्राम रीवापाली से पहुंचे एक आवेदक ने दिव्यांग अनुदान की मांग रखी। बाराद्वार क्षेत्र से आए एक ग्रामीण ने आंधी और बारिश से क्षतिग्रस्त मकान के कारण सहायता राशि की मांग की। मालखरौदा क्षेत्र से आए आवेदन में गंभीर मेडिकल इमरजेंसी के लिए आर्थिक सहायता मांगी गई। इसके अलावा सीमांकन, मनरेगा में नाम जोड़ने, बोर खनन, नलकूप स्थापना और भूमि नक्शा बटांकन जैसे मामलों पर भी आवेदन प्राप्त हुए।

जिला प्रशासन ने दोहराया कि प्रत्येक मंगलवार को आयोजित होने वाला जनदर्शन आम नागरिकों की समस्याओं को प्राथमिकता से सुनने और उनके शीघ्र समाधान की दिशा में एक नियमित प्रयास है। बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्री वासु जैन, अपर कलेक्टर श्री बीरेंद्र लकड़ा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. जनदर्शन में हर सप्ताह आवेदन लिए जाते हैं—लेकिन पिछले छह महीनों में प्राप्त आवेदनों में से कितने मामलों का वास्तविक समाधान हुआ और कितने अभी लंबित हैं?
  2. अगर लोगों को इलाज, आवास और सीमांकन जैसी मूलभूत समस्याओं के लिए सीधे कलेक्टर कार्यालय तक आना पड़ रहा है, तो स्थानीय स्तर की व्यवस्था कितनी प्रभावी मानी जाए?
  3. क्या जनदर्शन के आवेदनों की विभागवार सार्वजनिक मॉनिटरिंग व्यवस्था बनाई जाएगी, ताकि नागरिक यह देख सकें कि उनकी शिकायत किस स्तर पर लंबित है?

Post a Comment

Previous Post Next Post