| सुकमा; हर बारिश में टपकता था डर… अब पक्के घर में मुस्कुरा रही हैं माड़वी बुधरी Aajtak24 News |
सुकमा - कभी बारिश की हर बूंद के साथ डर और परेशानी झेलने वाली सुकमा जिले की माड़वी बुधरी आज अपने पक्के घर में सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी रही हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) ने उनकी जिंदगी को ऐसा मोड़ दिया, जिसने वर्षों की असुरक्षा और अभाव को उम्मीद और आत्मविश्वास में बदल दिया। सुकमा विकासखंड के ग्राम पंचायत डोडपाल निवासी श्रीमती माड़वी बुधरी का परिवार पहले एक कच्ची झोपड़ी में रहता था। बरसात के दिनों में छत से पानी टपकता था और पूरा परिवार भय और असुविधा के बीच रात गुजारने को मजबूर होता था। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण पक्का मकान बनाना उनके लिए सिर्फ एक सपना था।
लेकिन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना के प्रभावी क्रियान्वयन ने इस परिवार की तकदीर बदल दी। वित्तीय वर्ष 2024-25 में माड़वी बुधरी को योजना के तहत पक्के आवास की स्वीकृति मिली और अब उनका मजबूत घर बनकर तैयार हो चुका है। इस आवास निर्माण में विभिन्न योजनाओं का समन्वय भी देखने को मिला। मनरेगा के माध्यम से मजदूरी उपलब्ध कराई गई, जिससे निर्माण कार्य में आर्थिक सहायता मिली। वहीं स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत शौचालय निर्माण कर घर को सुविधाजनक और स्वच्छ बनाया गया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने सुकमा प्रवास के दौरान माड़वी बुधरी को सांकेतिक रूप से आवास की चाबी सौंपकर सम्मानित भी किया। इस अवसर ने जिले के अन्य हितग्राहियों में भी विश्वास और उत्साह का माहौल पैदा किया। कलेक्टर अमित कुमार ने कहा कि जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना का क्रियान्वयन प्राथमिकता के साथ किया जा रहा है ताकि पात्र हितग्राहियों को समय पर गुणवत्तापूर्ण आवास मिल सके। वहीं जिला पंचायत सीईओ मुकुंद ठाकुर ने बताया कि हितग्राहियों को योजनाओं का अधिकतम लाभ दिलाने के लिए लगातार मॉनिटरिंग और मार्गदर्शन किया जा रहा है।
माड़वी बुधरी ने भावुक होकर कहा कि पहले हर बारिश चिंता लेकर आती थी, लेकिन अब पक्के घर में परिवार के साथ सुरक्षित महसूस करती हूं। उन्होंने सरकार और प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह घर सिर्फ ईंट और सीमेंट का ढांचा नहीं, बल्कि उनके परिवार की नई जिंदगी की शुरुआत है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- प्रधानमंत्री आवास योजना के सफल उदाहरण सामने आ रहे हैं, लेकिन जिले में अब भी कितने पात्र परिवार ऐसे हैं जिन्हें पक्का घर मिलने का इंतजार है?
- क्या प्रशासन यह सुनिश्चित कर पा रहा है कि आवास निर्माण में गुणवत्ता से समझौता न हो, खासकर दूरस्थ और नक्सल प्रभावित इलाकों में?
- योजना के तहत स्वीकृति मिलने और घर पूर्ण होने के बीच कई हितग्राहियों को किस्तों में देरी की शिकायत रहती है — सुकमा जिले में ऐसी समस्याओं को रोकने के लिए क्या विशेष व्यवस्था की गई है?