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| राजगढ़; किसानों का डेटा गांव में बैठे-बैठे होगा फाइनल, लेकिन देरी पर अफसरों की जेब तक पहुंचेगा जुर्माना Aajtak24 News |
राजगढ़ - राजगढ़ में कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिले के सभी जनपद पंचायत सीईओ, ई-गवर्नेंस अधिकारियों, सीसीबी बैंक प्रतिनिधियों और सीएससी केंद्र प्रभारियों की समीक्षा बैठक ली। बैठक में एग्रीस्टेक पोर्टल पर चल रही फार्मर रजिस्ट्री और बकेट क्लोजिंग की धीमी प्रगति पर कड़ा असंतोष जताया गया। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि अब किसानों की पहचान और भूमि रिकॉर्ड से जुड़े सभी कार्यों को तेज करने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों में अटल सेवा केंद्र और पंचायत भवनों में बैठकर किसानों की फार्मर आईडी बनाई जाएगी।
उन्होंने निर्देश दिए कि सभी ग्राम पंचायत सचिव और रोजगार सहायक पूरी तरह से इस अभियान में सक्रिय रहें ताकि किसानों का शत-प्रतिशत पंजीयन और फार्मर आईडी लिंकिंग सुनिश्चित हो सके। कलेक्टर ने यह भी कहा कि शासन की योजनाओं के तहत खाद और बीज का वितरण अब केवल उन्हीं किसानों को मिलेगा जिनकी आईडी ई-विकास प्रणाली में दर्ज होगी। इसलिए सहकारी समितियों में रिटेलर मोबाइल एप को सक्रिय करना अनिवार्य किया गया है।
बैठक में यह भी तय किया गया कि जिन किसानों की फार्मर रजिस्ट्री या बकेट क्लोजिंग लंबित है, उन्हें शिविर से पहले दस्तावेजों सहित सूचना दी जाएगी ताकि कार्य समय पर पूरा हो सके। कार्य की निगरानी के लिए सीएससी जिला प्रभारी को नोडल अधिकारी बनाया गया है, जबकि पूरी जिम्मेदारी संबंधित जनपद सीईओ को सौंपी गई है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- जब फार्मर रजिस्ट्री में देरी पर जुर्माना और मुआवजे का प्रावधान है, तो अब तक जिम्मेदार अधिकारियों पर कितनी कार्रवाई हुई है और कितने किसानों को मुआवजा मिला है?
- गांव-गांव शिविर लगाने के बावजूद यदि पंजीयन में पिछड़ापन बना रहता है, तो क्या प्रशासन इसे तकनीकी समस्या मान रहा है या जमीनी स्तर पर लापरवाही स्वीकार की जाएगी?
- खाद और बीज वितरण को फार्मर आईडी से लिंक करने के बाद क्या यह गारंटी है कि छोटे और सीमांत किसान सिस्टम से बाहर नहीं रह जाएंगे, या यह नई डिजिटल बाधा बन सकती है?
