मुंगेली; शादी का सपना दिखाकर नाबालिग को भगाया… ‘ऑपरेशन मुस्कान’ में चिल्फी पुलिस ने आरोपी को दबोचा Aajtak24 News

मुंगेली; शादी का सपना दिखाकर नाबालिग को भगाया… ‘ऑपरेशन मुस्कान’ में चिल्फी पुलिस ने आरोपी को दबोचा Aajtak24 News

मुंगेली - जिले में “ऑपरेशन मुस्कान” के तहत चलाए जा रहे विशेष अभियान के दौरान चिल्फी पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। शादी का झांसा देकर नाबालिग बालिका को बहला-फुसलाकर भगाने और दुष्कर्म करने के आरोपी युवक को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से परिजनों ने राहत की सांस ली है। मामला चौकी डिंडौरी थाना चिल्फी क्षेत्र का है, जहां 13 मई 2026 को एक व्यक्ति ने पुलिस चौकी पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसकी नाबालिग बेटी को कोई अज्ञात युवक बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने अपराध क्रमांक 50/26 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

चूंकि मामला नाबालिग बालिका से जुड़ा था, इसलिए मुंगेली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नवनीत कौर छाबड़ा के मार्गदर्शन और डीएसपी हरविंदर सिंह के नेतृत्व में विशेष टीम गठित कर बालिका और आरोपी की लगातार तलाश शुरू की गई। विवेचना के दौरान पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली और तकनीकी सहायता के जरिए आरोपी की लोकेशन ग्राम लीलापुर में मिली। पुलिस टीम ने 16 मई 2026 को दबिश देकर नाबालिग बालिका को आरोपी दुर्गेश साहू उर्फ सुनील के कब्जे से बरामद कर लिया।

पूछताछ में पीड़िता ने बताया कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर उसके साथ दैहिक शोषण किया। इसके बाद पुलिस ने मामले में बीएनएस और पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराएं जोड़ते हुए आरोपी को हिरासत में लेकर विधिवत गिरफ्तार किया और न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान 20 वर्षीय दुर्गेश साहू उर्फ सुनील निवासी लीलापुर, चौकी डिंडौरी थाना चिल्फी के रूप में हुई है। कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक रघुवीर लाल चंद्रा, चौकी प्रभारी मनक राम ध्रुव सहित पुलिस टीम की अहम भूमिका रही। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि नाबालिगों से जुड़े अपराधों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई जारी रहेगी।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. नाबालिग बालिकाओं को शादी का झांसा देकर भगाने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं — क्या ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता और निगरानी व्यवस्था पर्याप्त नहीं है?
  2. अगर तकनीकी सहायता और मुखबिर से आरोपी तक पहुंचना संभव था, तो क्या ऐसी ट्रैकिंग व्यवस्था हर गुमशुदगी मामले में तुरंत सक्रिय की जाती है या केवल गंभीर मामलों में?
  3. पॉक्सो एक्ट के मामलों में तेजी से कार्रवाई की बात होती है, लेकिन पीड़ित परिवारों को कानूनी और मानसिक सहायता देने के लिए जिला स्तर पर क्या स्थायी सिस्टम मौजूद है?

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