| सरगुजा; बिलासपुर चौक जाने की बात कहकर निकली थी नाबालिग… 3 महीने बाद रायपुर से मिली Aajtak24 News |
सरगुजा - घर से बिलासपुर चौक जाने की बात कहकर निकली नाबालिग बालिका को आखिरकार सरगुजा पुलिस ने रायपुर से बरामद कर लिया। कई महीनों से चल रही तलाश के बाद मणिपुर थाना पुलिस ने आरोपी के ठिकाने पर दबिश देकर बालिका को सुरक्षित मुक्त कराया और आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया। पुलिस की इस कार्रवाई से परिजनों ने राहत की सांस ली है। मामले के अनुसार, प्रार्थी ने थाना मणिपुर में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी नाबालिग बेटी 17 फरवरी 2026 को दोपहर करीब 2:30 बजे बिलासपुर चौक जाने की बात कहकर घर से निकली थी, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटी। परिजनों ने रिश्तेदारों और आसपास काफी तलाश की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला।
रिपोर्ट के आधार पर थाना मणिपुर में अपराध क्रमांक 47/2026 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2), 64(2)N तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 4 और 6 के तहत मामला कायम कर जांच शुरू की गई। विवेचना के दौरान पुलिस लगातार बालिका की तलाश में जुटी रही। इसी बीच मुखबिर से सूचना मिली कि आरोपी विजय पोर्ते रायपुर जिले के बिरगांव स्थित किसान राइस मिल इलाके में मौजूद है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने तत्काल दबिश दी और आरोपी के कब्जे से अपहृत बालिका को बरामद कर लिया।
पूछताछ के दौरान आरोपी विजय पोर्ते ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। आरोपी की पहचान पटोरा खालपारा थाना लुंड्रा निवासी 24 वर्षीय विजय पोर्ते के रूप में हुई। पुलिस ने मेडिकल परीक्षण के बाद आरोपी को 17 मई 2026 को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया। इस पूरी कार्रवाई में थाना प्रभारी उप निरीक्षक सी.पी. तिवारी, सहायक उप निरीक्षक अनिल पांडेय, महिला प्रधान आरक्षक मालती तिवारी सहित पुलिस टीम के अन्य जवानों की अहम भूमिका रही। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि महिला और बाल अपराधों के मामलों में लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- नाबालिग बालिका करीब तीन महीने तक आरोपी के कब्जे में रही — क्या शुरुआती स्तर पर जांच और लोकेशन ट्रैकिंग में देरी हुई थी?
- क्या आरोपी पहले से पुलिस रिकॉर्ड में था, और यदि नहीं, तो नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है?
- ऐसे मामलों में बालिकाओं को बहला-फुसलाकर ले जाने की घटनाएं बढ़ रही हैं — क्या पुलिस स्कूलों और गांवों में कोई स्थायी जागरूकता अभियान चला रही है या कार्रवाई केवल घटना के बाद तक सीमित रहती है?